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Kangra News: चेक बाउंस मामले में दोषी को छह माह की साधारण कैद
Sun, 06 Sep 2026 08:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 06 Sep 2026 08:13 AM IST
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1.20 लाख के चेक के बदले चुकाने होंगे 2.40 लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। चेक बाउंस के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा अनीता शर्मा की अदालत ने दोषी महिला को छह माह की साधारण कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी को 2.40 लाख रुपये जुर्माना अदा करने के भी आदेश दिए हैं। जुर्माना राशि जमा नहीं करने पर दोषी को दो माह की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।
मामला श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड कांगड़ा की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी धारक विनोद कुमार के माध्यम से दायर किया गया था। शिकायतकर्ता कंपनी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत अदालत में शिकायत दायर की थी। अदालत में प्रस्तुत मामले के अनुसार आरोपी ने वाहन वित्तपोषण के लिए श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से ऋण लिया था। छह मार्च 2013 को जेसीबी के लिए ऋण लिया गया था। ऋण की देनदारी के भुगतान के लिए आरोपी ने कंपनी के पक्ष में 1.20 लाख रुपये का चेक जारी किया था।
चेक की तारीख पांच नवंबर 2022 थी। कंपनी ने चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया, लेकिन खाते में भुगतान नहीं हो सका और चेक बाउंस हो गया। इसके बाद कंपनी की ओर से आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत भुगतान के लिए कहा गया। भुगतान नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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मामले की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने महिला को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने छह माह की साधारण कैद के साथ 2.40 लाख रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। यह राशि मूल चेक की रकम 1.20 लाख रुपये की दोगुनी है। जुर्माने की राशि अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। चेक बाउंस के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा अनीता शर्मा की अदालत ने दोषी महिला को छह माह की साधारण कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी को 2.40 लाख रुपये जुर्माना अदा करने के भी आदेश दिए हैं। जुर्माना राशि जमा नहीं करने पर दोषी को दो माह की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।
मामला श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड कांगड़ा की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी धारक विनोद कुमार के माध्यम से दायर किया गया था। शिकायतकर्ता कंपनी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत अदालत में शिकायत दायर की थी। अदालत में प्रस्तुत मामले के अनुसार आरोपी ने वाहन वित्तपोषण के लिए श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से ऋण लिया था। छह मार्च 2013 को जेसीबी के लिए ऋण लिया गया था। ऋण की देनदारी के भुगतान के लिए आरोपी ने कंपनी के पक्ष में 1.20 लाख रुपये का चेक जारी किया था।
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चेक की तारीख पांच नवंबर 2022 थी। कंपनी ने चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया, लेकिन खाते में भुगतान नहीं हो सका और चेक बाउंस हो गया। इसके बाद कंपनी की ओर से आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत भुगतान के लिए कहा गया। भुगतान नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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मामले की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने महिला को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने छह माह की साधारण कैद के साथ 2.40 लाख रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। यह राशि मूल चेक की रकम 1.20 लाख रुपये की दोगुनी है। जुर्माने की राशि अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।