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Kangra News: पालमपुर में 92 की उम्र में जीत चाहते हैं शांता कुमार
Sun, 07 Sep 2025 09:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 07 Sep 2025 09:09 AM IST
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पालमपुर में पत्रकारों से बातचीत करते शांता कुमार। -संवाद
पालमपुर (कांगड़ा)। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने जीवन के इस अंतिम पड़ाव पर अपनी एक खास इच्छा जाहिर की है। वह हिमाचल प्रदेश के साथ पालमपुर में भी जीत हासिल करना चाहते हैं। 12 सितंबर को 92 वर्ष में प्रवेश करने वाले शांता कुमार आज भी राजनीति और सेहत के मामले में तरो-ताजा हैं।
शांता कुमार ने कहा कि सक्रिय राजनीति से उन्होंने विराम लिया है, लेकिन वह निष्क्रिय नहीं हैं। 60 साल की राजनीतिक यात्रा में प्रदेश और केंद्र स्तर पर उन्हें सब कुछ मिला है और जीवन से संतुष्ट हैं। मगर पालमपुर में हार का मलाल आज भी उनके दिल में है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह चुनाव उनके जीवन का अंतिम हो। आज तक पालमपुर में भाजपा क्यों हारी, इसका सबको पता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होना चाहिए। अब अंतिम लक्ष्य यही है कि भाजपा को पालमपुर में जीत दिलाकर जीवन के इस पड़ाव का सपना पूरा किया जाए।
सूत्रों के अनुसार शांता कुमार पालमपुर में भाजपा को एकजुट करने में लगे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अब पालमपुर का किला भाजपा के हाथों में ही रहे। वहीं, उन्होंने कांगड़ा जिले की अनदेखी पर भी संकेत दिए हैं और कहा कि कांगड़ा को भाजपा से भी बड़ी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में यही जिला सत्ताधारी पार्टी की ताकत बन सके।
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शांता कुमार ने कहा कि सक्रिय राजनीति से उन्होंने विराम लिया है, लेकिन वह निष्क्रिय नहीं हैं। 60 साल की राजनीतिक यात्रा में प्रदेश और केंद्र स्तर पर उन्हें सब कुछ मिला है और जीवन से संतुष्ट हैं। मगर पालमपुर में हार का मलाल आज भी उनके दिल में है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह चुनाव उनके जीवन का अंतिम हो। आज तक पालमपुर में भाजपा क्यों हारी, इसका सबको पता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होना चाहिए। अब अंतिम लक्ष्य यही है कि भाजपा को पालमपुर में जीत दिलाकर जीवन के इस पड़ाव का सपना पूरा किया जाए।
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सूत्रों के अनुसार शांता कुमार पालमपुर में भाजपा को एकजुट करने में लगे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अब पालमपुर का किला भाजपा के हाथों में ही रहे। वहीं, उन्होंने कांगड़ा जिले की अनदेखी पर भी संकेत दिए हैं और कहा कि कांगड़ा को भाजपा से भी बड़ी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में यही जिला सत्ताधारी पार्टी की ताकत बन सके।
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