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Kangra News: राजस्व विभाग की तकनीकी खामी से रजिस्ट्री प्रक्रिया ठप
Sat, 25 Apr 2026 06:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 25 Apr 2026 06:56 AM IST
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बलाहर और मसोट में समस्या, 13 अगस्त 2025 की अधिसूचना का आधा-अधूरा क्रियान्वयन
अपनी ही भूमि के हस्तांतरण के लिए दर-दर भटक रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश सरकार के जनहित में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों पर तकनीकी सुस्ती किस कदर भारी पड़ती है, इसका सीधा प्रमाण परागपुर तहसील में देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने 13 अगस्त, 2025 को एक अधिसूचना जारी कर महाल मसोट और बलाहर को देहरा तहसील से अलग कर परागपुर तहसील में सम्मिलित किया था।
इस निर्णय का उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों को प्रशासनिक सुगमता प्रदान करना था, लेकिन धरातल पर यह बदलाव अभी भी आधा-अधूरा ही नजर आ रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि इन दोनों गांवों का राजस्व रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक सेवाएं तो परागपुर स्थानांतरित हो चुकी हैं, परंतु नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम के पोर्टल पर इन गांवों का डेटा अपडेट न होने के कारण भूमि की रजिस्ट्री का कार्य पूरी तरह से बंद पड़ा है। राजस्व विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, देहरा तहसील के पटवार वृत्त से संबंधित समस्त कागजी रिकॉर्ड अब परागपुर तहसील के पटवार वृत्त गढ़ में आधिकारिक रूप से स्थानांतरित किया जा चुका है।
ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर भी यह गांव परागपुर तहसील का हिस्सा बन चुके हैं, जिसके आधार पर ग्रामीणों के विभिन्न प्रमाण पत्र और नकल जमाबंदी परागपुर से ही जारी की जा रही है। पटवारी की ओर से भी नियमानुसार मैनुअल रिपोर्ट दी जा रही है, लेकिन जब बात भूमि की खरीद-फरोख्त या रजिस्ट्री की आती है तो ऑनलाइन सिस्टम में इन गांवों के नाम परागपुर तहसील के अंतर्गत प्रदर्शित नहीं होते।
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इस तकनीकी विसंगति के कारण ग्रामीण न तो देहरा तहसील में रजिस्ट्री करवा पा रहे हैं और न ही परागपुर में, जिससे वे अधर में लटक गए हैं। स्थानीय निवासियों रुपिंदर सिंह डैनी, कुलदीप सिंह, मस्तान सिंह, विजय जसवाल, करनैल सिंह, वीरेंद्र सिंह और सेंटी जसवाल ने कहा कि सरकार की अधिसूचना के आठ महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें अपनी ही भूमि के हस्तांतरण के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए और एनजीडीआरएस पोर्टल को अविलंब अपडेट करवाया जाए ताकि इन दोनों महाल के लोग पूर्ण रूप से परागपुर तहसील की सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
बयान
जल्द ही दोनों महाल बलाहर और मसोट को एनजीडीआरएस के पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है। इस संदर्भ में परागपुर तहसील से संबंधित विभाग को ईमेल भेजकर आवश्यक पत्राचार भी किया गया है ताकि पोर्टल पर तकनीकी बदलाव जल्द पूरा हो सके।
-कुलवंत सिंह पोटन, एसडीएम, देहरा
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अपनी ही भूमि के हस्तांतरण के लिए दर-दर भटक रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश सरकार के जनहित में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों पर तकनीकी सुस्ती किस कदर भारी पड़ती है, इसका सीधा प्रमाण परागपुर तहसील में देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने 13 अगस्त, 2025 को एक अधिसूचना जारी कर महाल मसोट और बलाहर को देहरा तहसील से अलग कर परागपुर तहसील में सम्मिलित किया था।
इस निर्णय का उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों को प्रशासनिक सुगमता प्रदान करना था, लेकिन धरातल पर यह बदलाव अभी भी आधा-अधूरा ही नजर आ रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि इन दोनों गांवों का राजस्व रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक सेवाएं तो परागपुर स्थानांतरित हो चुकी हैं, परंतु नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम के पोर्टल पर इन गांवों का डेटा अपडेट न होने के कारण भूमि की रजिस्ट्री का कार्य पूरी तरह से बंद पड़ा है। राजस्व विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, देहरा तहसील के पटवार वृत्त से संबंधित समस्त कागजी रिकॉर्ड अब परागपुर तहसील के पटवार वृत्त गढ़ में आधिकारिक रूप से स्थानांतरित किया जा चुका है।
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ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर भी यह गांव परागपुर तहसील का हिस्सा बन चुके हैं, जिसके आधार पर ग्रामीणों के विभिन्न प्रमाण पत्र और नकल जमाबंदी परागपुर से ही जारी की जा रही है। पटवारी की ओर से भी नियमानुसार मैनुअल रिपोर्ट दी जा रही है, लेकिन जब बात भूमि की खरीद-फरोख्त या रजिस्ट्री की आती है तो ऑनलाइन सिस्टम में इन गांवों के नाम परागपुर तहसील के अंतर्गत प्रदर्शित नहीं होते।
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इस तकनीकी विसंगति के कारण ग्रामीण न तो देहरा तहसील में रजिस्ट्री करवा पा रहे हैं और न ही परागपुर में, जिससे वे अधर में लटक गए हैं। स्थानीय निवासियों रुपिंदर सिंह डैनी, कुलदीप सिंह, मस्तान सिंह, विजय जसवाल, करनैल सिंह, वीरेंद्र सिंह और सेंटी जसवाल ने कहा कि सरकार की अधिसूचना के आठ महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें अपनी ही भूमि के हस्तांतरण के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए और एनजीडीआरएस पोर्टल को अविलंब अपडेट करवाया जाए ताकि इन दोनों महाल के लोग पूर्ण रूप से परागपुर तहसील की सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
बयान
जल्द ही दोनों महाल बलाहर और मसोट को एनजीडीआरएस के पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है। इस संदर्भ में परागपुर तहसील से संबंधित विभाग को ईमेल भेजकर आवश्यक पत्राचार भी किया गया है ताकि पोर्टल पर तकनीकी बदलाव जल्द पूरा हो सके।
-कुलवंत सिंह पोटन, एसडीएम, देहरा