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Kangra News: पौंग झील में पहली बार दिखा दुर्लभ सौंग थ्रश पक्षी
Tue, 10 Feb 2026 05:08 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 10 Feb 2026 05:08 AM IST
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पौंग झील में पहली बार पहुंचा सौंग थ्रश प्रजाति का पक्षी। -स्रोत : विभाग
बरियाल (कांगड़ा)। अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट पौंग झील वेटलैंड से पक्षी प्रेमियों के लिए एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। वन्यजीव विभाग द्वारा आयोजित प्रवासी पक्षियों की वार्षिक गणना के दौरान यहां अत्यंत दुर्लभ सौंग थ्रश प्रजाति का पक्षी दर्ज किया गया है। भारत में इस पक्षी की मौजूदगी के प्रमाण विरले ही मिलते हैं।
यह दुर्लभ पक्षी स्थाना गांव के समीप शाह नहर बैराज के किनारे देखा गया है। पक्षी गणना के दौरान 1 फरवरी को ड्यूटी पर तैनात वन रक्षक महेश कुमार ने एक बौने पेड़ की टहनी पर बैठी इस छोटी चिड़िया को देखा और इसकी तस्वीरें कैमरे में कैद कर लीं। शुरुआत में इसकी विशिष्ट पहचान नहीं हो पाई थी, क्योंकि यह प्रजाति भारतीय उपमहाद्वीप में नियमित रूप से नहीं देखी जाती।
सटीक पहचान के लिए तस्वीरें पक्षी विशेषज्ञ डॉ. अभिनव और हिंमाशु चौधरी को भेजी गईं। विशेषज्ञों ने पक्षी के भूरे ऊपरी हिस्से, क्रीम रंग के निचले भाग पर गहरे तीर के आकार के धब्बों और इसकी विशिष्ट शारीरिक मुद्रा के आधार पर इसे सौंग थ्रश घोषित किया है।
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धर्मशाला के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. अभिनव ने बताया कि सौंग थ्रश मुख्य रूप से यूरोप और पश्चिमी एशिया में प्रजनन करते हैं और सर्दियों में उत्तरी अफ्रीका या दक्षिणी यूरोप की ओर प्रवास करते हैं। भारत में इसका दिखना एक दुर्लभ घटना है। इससे पहले अगस्त 2018 में पक्षी विज्ञानी अंकित विक्रांत ने इसे स्पीति घाटी में देखा था।
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यह दुर्लभ पक्षी स्थाना गांव के समीप शाह नहर बैराज के किनारे देखा गया है। पक्षी गणना के दौरान 1 फरवरी को ड्यूटी पर तैनात वन रक्षक महेश कुमार ने एक बौने पेड़ की टहनी पर बैठी इस छोटी चिड़िया को देखा और इसकी तस्वीरें कैमरे में कैद कर लीं। शुरुआत में इसकी विशिष्ट पहचान नहीं हो पाई थी, क्योंकि यह प्रजाति भारतीय उपमहाद्वीप में नियमित रूप से नहीं देखी जाती।
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सटीक पहचान के लिए तस्वीरें पक्षी विशेषज्ञ डॉ. अभिनव और हिंमाशु चौधरी को भेजी गईं। विशेषज्ञों ने पक्षी के भूरे ऊपरी हिस्से, क्रीम रंग के निचले भाग पर गहरे तीर के आकार के धब्बों और इसकी विशिष्ट शारीरिक मुद्रा के आधार पर इसे सौंग थ्रश घोषित किया है।
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धर्मशाला के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. अभिनव ने बताया कि सौंग थ्रश मुख्य रूप से यूरोप और पश्चिमी एशिया में प्रजनन करते हैं और सर्दियों में उत्तरी अफ्रीका या दक्षिणी यूरोप की ओर प्रवास करते हैं। भारत में इसका दिखना एक दुर्लभ घटना है। इससे पहले अगस्त 2018 में पक्षी विज्ञानी अंकित विक्रांत ने इसे स्पीति घाटी में देखा था।