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Kangra News: यूजीसी के नए नियमों के विरोध में गरजी राजपूत कल्याण सभा

Tue, 03 Feb 2026 06:09 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 06:09 AM IST
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Rajput Kalyan Sabha roared in protest against the new rules of UGC
धर्मशाला में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ रैली निकालते राजपूत कल्याण सभा के सदस्य। -संवाद
धर्मशाला। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के खिलाफ राजपूत कल्याण सभा हिमाचल प्रदेश ने सोमवार को धर्मशाला की सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। शहीद स्मारक से लेकर जिलाधीश कार्यालय तक निकाली गई रैली में केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और एडीएम कांगड़ा के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा गया।
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सभा के अध्यक्ष केएस चंबियाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में पहले से ही शिकायत निवारण के लिए विभिन्न कमेटियां गठित हैं। एससी/एसटी सेल जैसे प्रभावी तंत्र मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतों की वार्षिक दर 7.60 से 16.70 प्रतिशत के बीच रहती है। लगभग 90 प्रतिशत मामलों का समाधान वर्तमान संस्थागत व्यवस्थाओं से हो जाता है। ऐसे में नए और कठोर दंडात्मक नियमों की कोई आवश्यकता नहीं है।
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राजपूत कल्याण सभा ने आशंका जताई कि नए नियमों से एबीवीपी, एनएसयूआई और एसएफआई जैसे छात्र संगठनों की एकता प्रभावित होगी। सभा का तर्क है कि ये संगठन अब तक जाति-वर्ग से ऊपर उठकर शैक्षणिक मुद्दों पर लड़ते आए हैं, लेकिन नए नियमों से परिसरों में जाति-आधारित विभाजन बढ़ेगा, जिससे अकादमिक वातावरण दूषित होगा।
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एडीएम कांगड़ा को सौंपे ज्ञापन में सभा ने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि इन विनियमों को तत्काल वापस लिया जाए या शिक्षाविदों और हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में संतुलित वातावरण बना रहे।


नारेबाजी के बीच गुटों में बंटे सभा के सदस्य
प्रदर्शन के दौरान उस समय स्थिति असहज हो गई जब शहीद स्मारक पर भाषणबाजी चल रही थी। एक महिला वक्ता ने यूजीसी के नए नियमों के के लिए सीधे केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया और नारेबाजी शुरू कर दी। इसपर सभा दो गुटों में बंट गई। एक पक्ष इसे केवल गैर-राजनीतिक विरोध तक सीमित रखना चाहता था। मगर दूसरे पक्ष के सदस्यों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी। वक्ताओं ने रोष जताया कि सामान्य वर्ग से आने वाले सांसदों ने भी इस कानून के खिलाफ सदन में आवाज नहीं उठाई। इसके बाद जिलाधीश कार्यालय के बाहर कुछ सदस्यों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के खिलाफ भी नारेबाजी की। इस पर भी सभा के कई सदस्यों ने आपत्ति जताई।
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