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सकारात्मक सोच से मिलती है जीवन में सफलता : कृष्ण
Tue, 08 Apr 2025 05:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 08 Apr 2025 05:56 AM IST
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श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर कलश यात्रा में भाग लेेतीं महिलाएं। -स्रोत : आयोजक
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रक्कड़ (कांगड़ा)। चौली रक्कड़ में श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा में महिलाओं ने सिर पर कलश लेकर भाग लिया। धार्मिक वातावरण में निकाली गई इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इसके साथ ही श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन कथा वाचक अतुल कृष्ण ने जीवन और अध्यात्म से जुड़ी गूढ़ बातें साझा कीं।
उन्होंने कहा कि ईश्वर की आराधना में ही मनुष्य का सच्चा मंगल छिपा है। जीवन के सत्य को समझने के लिए श्रीमद् भागवत का अध्ययन आवश्यक है। समाज में आज अच्छाई की कमी नहीं, परंतु अच्छे लोग निष्क्रिय हो चले हैं। आज का अच्छा आदमी केवल बोलता है कि बुरा हो रहा है, जबकि उसे आग बुझाने के लिए पानी की बाल्टी भी साथ लानी चाहिए।
कथा वाचक ने आगे कहा कि सफलता और असफलता का निर्धारण हमारी सोच पर निर्भर करता है। अगर हम सफलता की आशा से भरे हैं तो परिणाम भी सकारात्मक होंगे। उन्होंने उदाहरण दिया कि एक करोड़ रुपये जुटाने के लिए सौ लोग एक-एक लाख दें, यह कठिन है। लेकिन यदि एक करोड़ लोग एक-एक रुपया दें तो यह कार्य सरल हो जाता है। यह सोच सामूहिक प्रयासों की महत्ता को दर्शाती है। इससे पहले शोभायात्रा में क्षेत्र की महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इस अवसर पर प्रकाश चंद्र ठाकुर, राजिंद्र पाल सिंह पम्मा, मानचंद ठाकुर, सुभाष ठाकुर, कुलभूषण ठाकुर, शुभलता ठाकुर, सुमिता ठाकुर व कोमल ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि ईश्वर की आराधना में ही मनुष्य का सच्चा मंगल छिपा है। जीवन के सत्य को समझने के लिए श्रीमद् भागवत का अध्ययन आवश्यक है। समाज में आज अच्छाई की कमी नहीं, परंतु अच्छे लोग निष्क्रिय हो चले हैं। आज का अच्छा आदमी केवल बोलता है कि बुरा हो रहा है, जबकि उसे आग बुझाने के लिए पानी की बाल्टी भी साथ लानी चाहिए।
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कथा वाचक ने आगे कहा कि सफलता और असफलता का निर्धारण हमारी सोच पर निर्भर करता है। अगर हम सफलता की आशा से भरे हैं तो परिणाम भी सकारात्मक होंगे। उन्होंने उदाहरण दिया कि एक करोड़ रुपये जुटाने के लिए सौ लोग एक-एक लाख दें, यह कठिन है। लेकिन यदि एक करोड़ लोग एक-एक रुपया दें तो यह कार्य सरल हो जाता है। यह सोच सामूहिक प्रयासों की महत्ता को दर्शाती है। इससे पहले शोभायात्रा में क्षेत्र की महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इस अवसर पर प्रकाश चंद्र ठाकुर, राजिंद्र पाल सिंह पम्मा, मानचंद ठाकुर, सुभाष ठाकुर, कुलभूषण ठाकुर, शुभलता ठाकुर, सुमिता ठाकुर व कोमल ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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