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पीएम आवास योजना : शहरी निकायों को 15 अप्रैल तक भेजने होंगे प्रस्ताव
Mon, 06 Apr 2026 06:52 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 06 Apr 2026 06:52 AM IST
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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। शहरी निकायों को प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू 2.0) के तहत पात्र लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया को महज 10 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। शहरी विकास विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सभी संबंधित निकाय 15 अप्रैल तक हर हाल में नए आवास प्रस्ताव विभाग को सौंप दें।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्ताव न भेजने वाले निकायों के खिलाफ कड़ी जवाबदेही तय की जाएगी और संबंधित अधिकारियों पर प्रशासनिक गाज भी गिर सकती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के लिए कुल 5000 नए आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें से 1361 आवासों को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है।
विभाग ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में वास्तविक मांग का जमीनी आकलन कर प्रस्ताव तैयार करें। जिन शहरी क्षेत्रों में आवास की मांग पूरी हो चुकी है, वहां के निकायों को 15 दिनों के भीतर नॉन-अवेलेबिलिटी ऑफ डिमांड का प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराना है।
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शहरी विकास विभाग ने चेतावनी दी है कि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय पर प्रस्ताव भेजने से संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित होगा और प्रदेश को अधिक से अधिक आवासों की स्वीकृति मिल सकेगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू 2.0) के तहत नए आवास प्रस्तावों को लेकर शहरी निकायों को स्पष्ट निर्देश मिले हैं। हमें समय रहते पूरी प्रक्रिया संपन्न करने को कहा गया है, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोगों को योजना का लाभ मिल सके। -अनुभव शर्मा, ईओ, नगर परिषद देहरा।
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विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्ताव न भेजने वाले निकायों के खिलाफ कड़ी जवाबदेही तय की जाएगी और संबंधित अधिकारियों पर प्रशासनिक गाज भी गिर सकती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के लिए कुल 5000 नए आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें से 1361 आवासों को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है।
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विभाग ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में वास्तविक मांग का जमीनी आकलन कर प्रस्ताव तैयार करें। जिन शहरी क्षेत्रों में आवास की मांग पूरी हो चुकी है, वहां के निकायों को 15 दिनों के भीतर नॉन-अवेलेबिलिटी ऑफ डिमांड का प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराना है।
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शहरी विकास विभाग ने चेतावनी दी है कि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय पर प्रस्ताव भेजने से संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित होगा और प्रदेश को अधिक से अधिक आवासों की स्वीकृति मिल सकेगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू 2.0) के तहत नए आवास प्रस्तावों को लेकर शहरी निकायों को स्पष्ट निर्देश मिले हैं। हमें समय रहते पूरी प्रक्रिया संपन्न करने को कहा गया है, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोगों को योजना का लाभ मिल सके। -अनुभव शर्मा, ईओ, नगर परिषद देहरा।