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Kangra News: लैंडिंग साइट पर छह पंचायतों के लोगों ने की महापंचायत, कहा- किसी भी कीमत पर साडा मंजूर नहीं
Mon, 09 Sep 2024 01:16 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 09 Sep 2024 01:16 AM IST
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साडा के विरोध में प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद
बैजनाथ (कांगड़ा)। स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) के दायरे में आईं छह पंचायत के लगभग 800 लोगों ने रविवार को पैराग्लाइडिंग लैंडिंग साइट क्योर में महापंचायत का आयोजन किया। आयोजन के संयोजक सतीश अबरोल ने बताया कि सभी पंचायतों के प्रधान, उपप्रधान और पंचायत सदस्यों सहित क्षेत्र की जनता ने इस महापंचायत में एक मत से साडा को हटाने की मांग की है।
क्षेत्र के चुने हुए प्रतिनिधियों, पूर्व प्रतिनिधियों सहित प्रबुद्ध जनों ने कहा कि नए क्षेत्रों में बिना पंचायत और स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए यह कानून उन पर थोंप दिया गया है, जबकि पुरानी पंचायतें जिनमें यह कानून लागू था, उन्हें किसी प्रकार की भी कोई सुविधा आज तक नहीं मिली है। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि स्थानीय विधायक एवं सीपीएस किशोरी लाल से प्रार्थना करते हैं कि वह इस मुद्दे पर सीएम साहब से दोबारा बात करें और इस विषय पर जल्दी राहत प्रदान करवाने की कृपा करें।
साडा संघर्ष समिति का गठन
महापंचायत में साडा संघर्ष समिति का गठन भी किया गया जिसमें फैसला लिया गया कि यह संघर्ष समिति पंचायत के नेतृत्व में ही अपनी लड़ाई लड़ेगी और सभी पंचायत के प्रधान और उपप्रधान इस समिति के सदस्य होंगे। इसके अलावा संसाल पंचायत के भारगी से प्रेम सिंह, राजकुमार, शक्ति चंद, बीड़ से संदीप कुमार, देशराज गुनेहड़ से कंचन देवी, सुरेंद्र, देवराज, अमित कपूर, वीरेंद्र और चौगान पंचायत से मनोहर लाल, सचिन, हरिराम, विमला देवी, किशोरी, सुमन देवी, क्योर पंचायत से देशराज, भीकम राम, उत्तम सिंह, मानसिंह और हीम सिंह के नाम कमेटी में शामिल किए गए।
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बोले- कमाई अधिक, विकास पर खर्च कम
वक्ताओं ने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि साडा से कमाई तो बहुत की जा रही है, लेकिन विकास के लिए उसमें से बहुत ही कम धनराशि खर्च की जा रही है। साडा के तहत उगाहे गए पैसे का कोई हिसाब-किताब आम जनमानस को या पंचायत को नहीं बताया जाता। सबसे बड़ी दिक्कत इस क्षेत्र में बनाए गए (ईएलयू) जमीन की वर्तमान स्थिति से है, जो पूरी तरह लोगों को जानकारी दिए बिना बनाया गया है। जमीन की वर्तमान स्थिति को लेकर हजारों की तादाद में गलतियां हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी या टीसीपी की विभाग के कर्मचारियों ने आज तक उसे जमीन पर चेक करने की कोशिश नहीं की है कि वह सही बना है या गलत जबकि उसी के अनुसार सारे निर्णय होते हैं और लाखों की फीस कंपनी को इसके एवज में दी गई है।
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क्षेत्र के चुने हुए प्रतिनिधियों, पूर्व प्रतिनिधियों सहित प्रबुद्ध जनों ने कहा कि नए क्षेत्रों में बिना पंचायत और स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए यह कानून उन पर थोंप दिया गया है, जबकि पुरानी पंचायतें जिनमें यह कानून लागू था, उन्हें किसी प्रकार की भी कोई सुविधा आज तक नहीं मिली है। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि स्थानीय विधायक एवं सीपीएस किशोरी लाल से प्रार्थना करते हैं कि वह इस मुद्दे पर सीएम साहब से दोबारा बात करें और इस विषय पर जल्दी राहत प्रदान करवाने की कृपा करें।
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साडा संघर्ष समिति का गठन
महापंचायत में साडा संघर्ष समिति का गठन भी किया गया जिसमें फैसला लिया गया कि यह संघर्ष समिति पंचायत के नेतृत्व में ही अपनी लड़ाई लड़ेगी और सभी पंचायत के प्रधान और उपप्रधान इस समिति के सदस्य होंगे। इसके अलावा संसाल पंचायत के भारगी से प्रेम सिंह, राजकुमार, शक्ति चंद, बीड़ से संदीप कुमार, देशराज गुनेहड़ से कंचन देवी, सुरेंद्र, देवराज, अमित कपूर, वीरेंद्र और चौगान पंचायत से मनोहर लाल, सचिन, हरिराम, विमला देवी, किशोरी, सुमन देवी, क्योर पंचायत से देशराज, भीकम राम, उत्तम सिंह, मानसिंह और हीम सिंह के नाम कमेटी में शामिल किए गए।
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बोले- कमाई अधिक, विकास पर खर्च कम
वक्ताओं ने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि साडा से कमाई तो बहुत की जा रही है, लेकिन विकास के लिए उसमें से बहुत ही कम धनराशि खर्च की जा रही है। साडा के तहत उगाहे गए पैसे का कोई हिसाब-किताब आम जनमानस को या पंचायत को नहीं बताया जाता। सबसे बड़ी दिक्कत इस क्षेत्र में बनाए गए (ईएलयू) जमीन की वर्तमान स्थिति से है, जो पूरी तरह लोगों को जानकारी दिए बिना बनाया गया है। जमीन की वर्तमान स्थिति को लेकर हजारों की तादाद में गलतियां हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी या टीसीपी की विभाग के कर्मचारियों ने आज तक उसे जमीन पर चेक करने की कोशिश नहीं की है कि वह सही बना है या गलत जबकि उसी के अनुसार सारे निर्णय होते हैं और लाखों की फीस कंपनी को इसके एवज में दी गई है।