{"_id":"65dcecbed7c587cf090dbad6","slug":"opd-opened-after-two-days-leave-problems-of-patients-did-not-reduce-kangra-news-c-95-1-kng1003-126896-2024-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: दो दिन छुट्टी के बाद ओपीडी खुली, कम नहीं हुई मरीजों की परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: दो दिन छुट्टी के बाद ओपीडी खुली, कम नहीं हुई मरीजों की परेशानी
Tue, 27 Feb 2024 01:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 27 Feb 2024 01:26 AM IST
विज्ञापन
धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में पेनडाउन हड़ताल के सातवें दिन सोमवार को चलने-फिरने में असमर्थ मरीज व्हीलचेयर पर चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। अस्पताल में देरी से इलाज मिलने से परेशान मरीज और तीमारदार परेशान हुए। दो दिन छुट्टी के कारण सोमवार को अस्पताल में एक हजार के ऊपर की ओपीडी रही। इस बीच कई मरीजों ने निजी चिकित्सालयों का रूख कर लिया और कुछ लोग लंबी लाइनों को देखकर वापस लौट गए।
इसके साथ हड़ताल से अनजान लोगों ने मजबूरी के कारण मेडिकल स्टोराें से दवाइयां ले लीं। जिले भर के सभी अस्पतालों में डॉक्टर अपनी मांगों काे लेकर रोजाना सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक पेनडाउन हड़ताल कर रहे हैं, जिससे अस्पताल में आ रहे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल से ज्यादातर परेशानी छोटे बच्चों और कामकाजी लोगों को हो रही है।
क्या कहते हैं मरीज-
शीला गांव के निवासी अतुल कुमार ने बताया कि वह सुबह 10 बजे से अपना पत्नी की जांच करवाने अस्पताल पहुंचे हैं परंतु हड़ताल के बारे में जानकारी न होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि हड़ताल के कारण कामकाजी लोगों को काम में देरी हो जाती है और उनके आगे के काम रूक जाते हैं।
विज्ञापन
गमरु से भारती ने बताया कि वह अपने बच्चे के जांच के लिए अस्पताल में सुबह 10 बजे से आई हुई हैं। परंतु हड़ताल के कारण उन्हें अपने बीमार बच्चे के साथ देर तक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे का निजी चिकित्सालयों में इलाज करवाया परंतुु कहीं आराम न मिलने के बाद उन्हें भीड़ में लगकर जांच का इंतजार करना पड़ा।
टिकरी से मगा देवी ने बताया कि वह सुबह 8 बजे से अस्पताल में अपनी दवाईयां लेने अस्पताल पहुंची परंतु हड़ताल के कारण उन्हें लंबी लाइन में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
घरोह से शकुंतला देवी ने बताया कि वह सुबह 9:30 से अस्पताल पहुंची लेकिन हड़ताल के चलते उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। इसके साथ ही कम दिखने और सुनने के कारण उन्हें भीड़ में धक्के खाने पड़े।
कांगड़ा से चतर सिंह का कहना है कि वह सुबह 8 बजे से अपने शरीर के दर्दों की जांच के लिए अस्पताल आए परंतु हड़ताल के कारण उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। शरीर में दर्दों के कारण उन्हें बैठने में दिक्कत हुई।
विज्ञापन
इसके साथ हड़ताल से अनजान लोगों ने मजबूरी के कारण मेडिकल स्टोराें से दवाइयां ले लीं। जिले भर के सभी अस्पतालों में डॉक्टर अपनी मांगों काे लेकर रोजाना सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक पेनडाउन हड़ताल कर रहे हैं, जिससे अस्पताल में आ रहे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल से ज्यादातर परेशानी छोटे बच्चों और कामकाजी लोगों को हो रही है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं मरीज-
शीला गांव के निवासी अतुल कुमार ने बताया कि वह सुबह 10 बजे से अपना पत्नी की जांच करवाने अस्पताल पहुंचे हैं परंतु हड़ताल के बारे में जानकारी न होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि हड़ताल के कारण कामकाजी लोगों को काम में देरी हो जाती है और उनके आगे के काम रूक जाते हैं।
विज्ञापन
गमरु से भारती ने बताया कि वह अपने बच्चे के जांच के लिए अस्पताल में सुबह 10 बजे से आई हुई हैं। परंतु हड़ताल के कारण उन्हें अपने बीमार बच्चे के साथ देर तक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे का निजी चिकित्सालयों में इलाज करवाया परंतुु कहीं आराम न मिलने के बाद उन्हें भीड़ में लगकर जांच का इंतजार करना पड़ा।
टिकरी से मगा देवी ने बताया कि वह सुबह 8 बजे से अस्पताल में अपनी दवाईयां लेने अस्पताल पहुंची परंतु हड़ताल के कारण उन्हें लंबी लाइन में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
घरोह से शकुंतला देवी ने बताया कि वह सुबह 9:30 से अस्पताल पहुंची लेकिन हड़ताल के चलते उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। इसके साथ ही कम दिखने और सुनने के कारण उन्हें भीड़ में धक्के खाने पड़े।
कांगड़ा से चतर सिंह का कहना है कि वह सुबह 8 बजे से अपने शरीर के दर्दों की जांच के लिए अस्पताल आए परंतु हड़ताल के कारण उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। शरीर में दर्दों के कारण उन्हें बैठने में दिक्कत हुई।