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खतरा एक, ड्यूटी एक तो पेंशन भी एक हो : मनवीर कटोच
Sun, 23 Aug 2026 06:53 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 23 Aug 2026 06:53 AM IST
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ओपीएस का मामला हल न होने से खुद को ठगा महसूस कर रहे पैरामिलिट्री के जवान
संवाद न्यूज एजेंसी
पालमपुर (कांगड़ा)। सेवानिवृत्त पैरामिलिट्री कल्याण संगठन के प्रदेश प्रवक्ता मनवीर चंद कटोच ने कहा कि देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की पहली दीवार माने जाने वाले पैरामिलिट्री बलों के जवान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी और असम राइफल्स सहित सभी सीएपीएफ जवानों को एक जनवरी 2004 से नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत रखा गया है।
उन्होंने कहा कि जनवरी 2023 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि पैरामिलिट्री बल संघ के सशस्त्र बल हैं और इसलिए वे सीसीएस पेंशन नियम, 1972 के तहत पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के हकदार हैं। न्यायालय ने केंद्र सरकार को आठ सप्ताह में आदेश लागू करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी, जिसके चलते मामला अब तक लंबित है।
कटोच ने कहा कि जब खतरा एक और ड्यूटी एक है तो पेंशन अलग-अलग क्यों होनी चाहिए। पैरामिलिट्री जवान सीमा सुरक्षा, युद्ध, आतंकवाद, नक्सलवाद और तस्करी के खिलाफ सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी करते हैं। उन्होंने कहा कि बीएसएफ अधिनियम, 1968 और गृह मंत्रालय के छह अगस्त 2004 के आदेश में भी इन्हें ‘आर्म्ड फोर्स ऑफ द यूनियन’ कहा गया है।
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उन्होंने कहा कि 1971 के भारत-पाक युद्ध, कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर समेत विभिन्न अभियानों में पैरामिलिट्री जवानों ने शौर्य और बलिदान का परिचय दिया है। देश की आन, बान और शान के लिए हजारों जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। ऐसे में उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पालमपुर (कांगड़ा)। सेवानिवृत्त पैरामिलिट्री कल्याण संगठन के प्रदेश प्रवक्ता मनवीर चंद कटोच ने कहा कि देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की पहली दीवार माने जाने वाले पैरामिलिट्री बलों के जवान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी और असम राइफल्स सहित सभी सीएपीएफ जवानों को एक जनवरी 2004 से नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत रखा गया है।
उन्होंने कहा कि जनवरी 2023 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि पैरामिलिट्री बल संघ के सशस्त्र बल हैं और इसलिए वे सीसीएस पेंशन नियम, 1972 के तहत पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के हकदार हैं। न्यायालय ने केंद्र सरकार को आठ सप्ताह में आदेश लागू करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी, जिसके चलते मामला अब तक लंबित है।
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कटोच ने कहा कि जब खतरा एक और ड्यूटी एक है तो पेंशन अलग-अलग क्यों होनी चाहिए। पैरामिलिट्री जवान सीमा सुरक्षा, युद्ध, आतंकवाद, नक्सलवाद और तस्करी के खिलाफ सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी करते हैं। उन्होंने कहा कि बीएसएफ अधिनियम, 1968 और गृह मंत्रालय के छह अगस्त 2004 के आदेश में भी इन्हें ‘आर्म्ड फोर्स ऑफ द यूनियन’ कहा गया है।
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उन्होंने कहा कि 1971 के भारत-पाक युद्ध, कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर समेत विभिन्न अभियानों में पैरामिलिट्री जवानों ने शौर्य और बलिदान का परिचय दिया है। देश की आन, बान और शान के लिए हजारों जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। ऐसे में उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए।