{"_id":"6831bf03062579ed7600d502","slug":"officers-should-ensure-that-schemes-reach-farmers-fields-chandra-kumar-kangra-news-c-95-1-ssml1008-178468-2025-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों के खेतों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करें अधिकारी: चंद्र कुमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों के खेतों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करें अधिकारी: चंद्र कुमार
विज्ञापन
धर्मशाला। उत्तरी क्षेत्र के कृषि अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को धर्मशाला में कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार चौधरी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, चंबा तथा ऊना जिलों के कृषि अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ किसानों के खेतों तक समयबद्ध रूप से पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि हर किसान की जेब में एटीएम की तरह किसान क्रेडिट कार्ड होना चाहिए ताकि वे कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा का लाभ उठा सकें।
मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों का पंजीकरण किया जाए। उन्होंने भूमि की मैपिंग, कृषि योग्य भूमि की स्थिति का आकलन तथा विभिन्न फसलों के अनुरूप क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। सिंचाई की सुविधा को दुरुस्त करने के लिए मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे पुरानी कूहलों और सिंचाई स्रोतों का अध्ययन करें और भू-संरक्षण अधिकारी अगली बैठक में जल क्षमता वृद्धि और कार्य योजना प्रस्तुत करें। उन्होंने वर्षा जल संग्रहण प्रणाली तथा नलकूपों की स्थापना पर भी जोर दिया। मंत्री ने निष्क्रिय पड़े कृषि फार्मों को सक्रिय कर उनमें एग्रो टूरिज्म और नवाचार आधारित गतिविधियां आरंभ करने की बात कही। साथ ही मिट्टी परीक्षण की महत्ता को रेखांकित करते हुए कृषि मंत्री ने अधिक से अधिक किसानों की भूमि का परीक्षण करने को कहा। उन्होंने सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई योजनाओं को बढ़ावा देने की भी बात कही। इस मौके पर अतिरिक्त कृषि निदेशक डॉ. राहुल कटोच, कृषि उपनिदेशक डॉ. कुलदीप धीमान, जायका प्रोजेक्ट निदेशक, उपनिदेशक कृषि, विषय विशेषज्ञ, सॉयल टेस्टिंग अधिकारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों का पंजीकरण किया जाए। उन्होंने भूमि की मैपिंग, कृषि योग्य भूमि की स्थिति का आकलन तथा विभिन्न फसलों के अनुरूप क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। सिंचाई की सुविधा को दुरुस्त करने के लिए मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे पुरानी कूहलों और सिंचाई स्रोतों का अध्ययन करें और भू-संरक्षण अधिकारी अगली बैठक में जल क्षमता वृद्धि और कार्य योजना प्रस्तुत करें। उन्होंने वर्षा जल संग्रहण प्रणाली तथा नलकूपों की स्थापना पर भी जोर दिया। मंत्री ने निष्क्रिय पड़े कृषि फार्मों को सक्रिय कर उनमें एग्रो टूरिज्म और नवाचार आधारित गतिविधियां आरंभ करने की बात कही। साथ ही मिट्टी परीक्षण की महत्ता को रेखांकित करते हुए कृषि मंत्री ने अधिक से अधिक किसानों की भूमि का परीक्षण करने को कहा। उन्होंने सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई योजनाओं को बढ़ावा देने की भी बात कही। इस मौके पर अतिरिक्त कृषि निदेशक डॉ. राहुल कटोच, कृषि उपनिदेशक डॉ. कुलदीप धीमान, जायका प्रोजेक्ट निदेशक, उपनिदेशक कृषि, विषय विशेषज्ञ, सॉयल टेस्टिंग अधिकारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
विज्ञापन