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Kangra News: नूपुर की रौनक में सन्नाटा, अनदेखी से बढ़ रहा घाटा
Tue, 28 Oct 2025 07:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 28 Oct 2025 07:39 AM IST
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नूरपुर स्थित एचपीटीडीसी का होटल नूपुर। - स्रोत :जागरूक पाठक
जसूर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) का नूरपुर स्थित होटल नूपुर, जो पहले स्पेन स्पा के नाम से जाना जाता था, आज उपेक्षा की मार झेल रहा है। निजी कंपनी से अपने अधीन लेने के बाद एचपीटीडीसी ने नौ साल से कोई मरम्मत अथवा नवीनीकरण का कार्य नहीं किया है। इससे भी निगम घाटे में चल रहा है।
कुछ वर्ष पहले तक यह होटल विवाह समारोहों, पारिवारिक कार्यक्रमों और कॉन्फ्रेंस के लिए लोगों की पहली पसंद हुआ करता था। सुविधाओं की कमी के चलते अब इसकी बुकिंग में भारी गिरावट आई है। इससे भी निगम को घाटा हो रहा है। होटल प्रबंधक गुलशन शर्मा के अनुसार पहले होटल की ऑक्यूपेंसी 90 प्रतिशत तक रहती थी जो अब घटकर 50 प्रतिशत तक रह गई है। इमारत को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है।
करीब एक करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में तत्कालीन एचपीटीडीसी अध्यक्ष एवं विधायक राकेश पठानिया की पहल पर यह होटल बनाया गया था। इसमें उस वक्त लोगों कुछ वर्षों तक होटल का संचालन एचपीटीडीसी ने किया। बाद में एक निजी कंपनी को लीज पर दिया गया।
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किराया जमा न करने पर मामला फंस गया। लंबी प्रक्रिया के बाद सितंबर 2011 में निगम ने होटल का कब्जा फिर से हासिल किया और इसे 27 सितंबर 2016 को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर दोबारा शुरू किया गया। हालांकि वर्ष 2016 के बाद से होटल का कोई नवीनीकरण नहीं हुआ है। इमारत की दीवारें, फर्नीचर और संरचना अब जर्जर हो चुकी हैं। आगंतुकों ने यहां रेस्टोरेंट सुविधा शुरू करने की मांग उठाई है, ताकि इसे होटल-कम-रेस्टोरेंट के रूप में विकसित किया जा सके।
लोकेशन खूबसूरत पर सुविधाओं का अभाव
होटल नूपुर नूरपुर शहर की सीमा पर खुशीनगर में पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर है। जसूर से शाहपुर तक मार्ग पर कोई उच्च स्तरीय रेस्टोरेंट नहीं है। पर्यटकों का कहना है कि यदि होटल को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए तो यह यात्रियों और खानपान प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।
पर्यटकों का सुझाव- दर्शन सर्किट पैकेज बनाएं
अमृतसर, चंडीगढ़ और लुधियाना से आए पर्यटक राजेश कुमार, रोहित, राजन, मधुर, संदीप, आशीष और अमन ने कहा कि होटल नूपुर से धार्मिक-एतिहासिक स्थल दर्शन सर्किट पैकेज शुरू करना चाहिए। पहले पैकेज में नूरपुर किला, बृजराज स्वामी मंदिर और पौंग झील को शामिल किया जा सकता है, जबकि दूसरे पैकेज में नागनी माता मंदिर (कंडवाल), बगलामुखी मंदिर (कोटला) और काठगढ़ शिव मंदिर (इंदौरा) जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ा जा सकता है।
होटल नूपुर के नवीनीकरण का प्रस्ताव निगम के निदेशक मंडल के विचाराधीन है। जल्द ही आवश्यक मरम्मत सहित अन्य कार्य करवाए जाएंगे। -कैलाश ठाकुर, सहायक महाप्रबंध, एचपीटीडीसी कांगड़ा
घाटे वाले होटलों को निजी हाथों में देने की फैसला ले चुकी है सरकार
जुलाई में हिमाचल सरकार एचपीटीडीसी के एक दशक से अधिक समय से घाटे में चल रहे प्रदेशभर के 14 होटलों निजी हाथों में सौंपने का निर्णय ले चुकी है। सरकारी निर्देशों के अनुसार इन होटलों का ऑपरेशन और मेंटिनेंस निजी कंपनियां या व्यक्ति विशेष संभालेंगे। इसके लिए पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक को तीन महीने के भीतर औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
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कुछ वर्ष पहले तक यह होटल विवाह समारोहों, पारिवारिक कार्यक्रमों और कॉन्फ्रेंस के लिए लोगों की पहली पसंद हुआ करता था। सुविधाओं की कमी के चलते अब इसकी बुकिंग में भारी गिरावट आई है। इससे भी निगम को घाटा हो रहा है। होटल प्रबंधक गुलशन शर्मा के अनुसार पहले होटल की ऑक्यूपेंसी 90 प्रतिशत तक रहती थी जो अब घटकर 50 प्रतिशत तक रह गई है। इमारत को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है।
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करीब एक करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में तत्कालीन एचपीटीडीसी अध्यक्ष एवं विधायक राकेश पठानिया की पहल पर यह होटल बनाया गया था। इसमें उस वक्त लोगों कुछ वर्षों तक होटल का संचालन एचपीटीडीसी ने किया। बाद में एक निजी कंपनी को लीज पर दिया गया।
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किराया जमा न करने पर मामला फंस गया। लंबी प्रक्रिया के बाद सितंबर 2011 में निगम ने होटल का कब्जा फिर से हासिल किया और इसे 27 सितंबर 2016 को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर दोबारा शुरू किया गया। हालांकि वर्ष 2016 के बाद से होटल का कोई नवीनीकरण नहीं हुआ है। इमारत की दीवारें, फर्नीचर और संरचना अब जर्जर हो चुकी हैं। आगंतुकों ने यहां रेस्टोरेंट सुविधा शुरू करने की मांग उठाई है, ताकि इसे होटल-कम-रेस्टोरेंट के रूप में विकसित किया जा सके।
लोकेशन खूबसूरत पर सुविधाओं का अभाव
होटल नूपुर नूरपुर शहर की सीमा पर खुशीनगर में पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर है। जसूर से शाहपुर तक मार्ग पर कोई उच्च स्तरीय रेस्टोरेंट नहीं है। पर्यटकों का कहना है कि यदि होटल को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए तो यह यात्रियों और खानपान प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।
पर्यटकों का सुझाव- दर्शन सर्किट पैकेज बनाएं
अमृतसर, चंडीगढ़ और लुधियाना से आए पर्यटक राजेश कुमार, रोहित, राजन, मधुर, संदीप, आशीष और अमन ने कहा कि होटल नूपुर से धार्मिक-एतिहासिक स्थल दर्शन सर्किट पैकेज शुरू करना चाहिए। पहले पैकेज में नूरपुर किला, बृजराज स्वामी मंदिर और पौंग झील को शामिल किया जा सकता है, जबकि दूसरे पैकेज में नागनी माता मंदिर (कंडवाल), बगलामुखी मंदिर (कोटला) और काठगढ़ शिव मंदिर (इंदौरा) जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ा जा सकता है।
होटल नूपुर के नवीनीकरण का प्रस्ताव निगम के निदेशक मंडल के विचाराधीन है। जल्द ही आवश्यक मरम्मत सहित अन्य कार्य करवाए जाएंगे। -कैलाश ठाकुर, सहायक महाप्रबंध, एचपीटीडीसी कांगड़ा
घाटे वाले होटलों को निजी हाथों में देने की फैसला ले चुकी है सरकार
जुलाई में हिमाचल सरकार एचपीटीडीसी के एक दशक से अधिक समय से घाटे में चल रहे प्रदेशभर के 14 होटलों निजी हाथों में सौंपने का निर्णय ले चुकी है। सरकारी निर्देशों के अनुसार इन होटलों का ऑपरेशन और मेंटिनेंस निजी कंपनियां या व्यक्ति विशेष संभालेंगे। इसके लिए पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक को तीन महीने के भीतर औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं।