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Kangra News: हथकरघा परंपरा से रूबरू हुए निफ्ट के विद्यार्थी
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राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान कांगड़ा में हथकरघा पखवाड़ा एवं राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 क
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कांगड़ा। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) कांगड़ा में हथकरघा पखवाड़ा एवं राष्ट्रीय हथकरघा दिवस-2026 के तहत आयोजित अकादमिक, रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों का शुक्रवार को समापन हुआ।
पखवाड़े के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय हथकरघा की परंपरा, तकनीकों और कारीगरों के योगदान से परिचित करवाया गया। समापन समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. राहुल चंद्र ने क्राफ्ट कलेक्टिव कैटलॉग का विमोचन किया।
निफ्ट कांगड़ा की इस पहल के तहत परिसर में कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों के प्रदर्शन, प्रचार और बिक्री के लिए मंच उपलब्ध करवाया जाता है। पिछले तीन वर्षों से संचालित यह पहल पारंपरिक शिल्प को उपभोक्ताओं और डिजाइन समुदाय से जोड़ने में मदद कर रही है।
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पखवाड़े के दौरान विद्यार्थियों के लिए परंपरा के हर धागे में, कला हर हाथ में विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता करवाई गई। इसके अलावा हथकरघा फोटो बूथ, फैशन वॉक, ड्रेपिंग कार्यशाला और प्रश्नोत्तरी का आयोजन हुआ। 10 अगस्त को कताई एवं बुनाई की व्यावहारिक कार्यशाला में कांगड़ा की बुनकर बिमलेश कुमारी और कमलेश कुमारी ने विद्यार्थियों को पारंपरिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया।
समापन अवसर पर पोस्टर, छायाचित्र और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। निदेशक डॉ. राहुल चंद्र ने आयोजन से जुड़े फैकल्टी, स्टाफ और विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारतीय हथकरघा हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें फैशन, नवाचार व रचनात्मक उद्योगों के लिए भी व्यापक संभावनाएं हैं।
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पखवाड़े के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय हथकरघा की परंपरा, तकनीकों और कारीगरों के योगदान से परिचित करवाया गया। समापन समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. राहुल चंद्र ने क्राफ्ट कलेक्टिव कैटलॉग का विमोचन किया।
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निफ्ट कांगड़ा की इस पहल के तहत परिसर में कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों के प्रदर्शन, प्रचार और बिक्री के लिए मंच उपलब्ध करवाया जाता है। पिछले तीन वर्षों से संचालित यह पहल पारंपरिक शिल्प को उपभोक्ताओं और डिजाइन समुदाय से जोड़ने में मदद कर रही है।
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पखवाड़े के दौरान विद्यार्थियों के लिए परंपरा के हर धागे में, कला हर हाथ में विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता करवाई गई। इसके अलावा हथकरघा फोटो बूथ, फैशन वॉक, ड्रेपिंग कार्यशाला और प्रश्नोत्तरी का आयोजन हुआ। 10 अगस्त को कताई एवं बुनाई की व्यावहारिक कार्यशाला में कांगड़ा की बुनकर बिमलेश कुमारी और कमलेश कुमारी ने विद्यार्थियों को पारंपरिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया।
समापन अवसर पर पोस्टर, छायाचित्र और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। निदेशक डॉ. राहुल चंद्र ने आयोजन से जुड़े फैकल्टी, स्टाफ और विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारतीय हथकरघा हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें फैशन, नवाचार व रचनात्मक उद्योगों के लिए भी व्यापक संभावनाएं हैं।