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पशुधन का टीकाकरण न किया तो आंदोलन
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घुमंतू पशुपालक महासभा के सदस्य और पदाधिकारी एसडीएम सलीम आजम को मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए?
- फोटो : Kangra
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बैजनाथ (कांगड़ा)। हिमाचल घुमंतु पशुपालक महासभा का अधिवेशन पपरोला ठारू में हुआ। भेड़ पालकों ने उपेक्षा का आरोप लगाते हुए विभाग और सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। बैठक में कांगड़ा, मंडी, चंबा तथा कुल्लू जिले के भेड़ पालकों ने विश्व पशु चिकित्सा दिवस पर घुमंतू पशुओं की चिकित्सा सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने समस्याओं को लेकर एसडीएम बैजनाथ सलीम आजम के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन भेजा। हिमाचल घुमंतू पशुपालक महासंघ के अध्यक्ष राजकुमार भट्ट और सचिव पवना कुमारी ने कहा कि वे पुश्तों से भेड़-बकरी पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीन-चार वर्ष से खुर-मुंह तथा फुट रोट रोग के कारण बहुत सारी भेड़-बकरियां मर चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में घुमंतू पशुपालकों को प्रशिक्षण और विशेष सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। जब वे ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में जाते हैं, तो पशुधन में जानलेवा बीमारियां फैलती हैं। महासभा पशुपालन विभाग से मांग की कि घुमंतू पशुधन को चिह्नित कर तुरंत टीकाकरण किया जाए। अधिवेशन में फैसला लिया कि यदि 15 दिन में मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो उन्हें मजबूरन संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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उन्होंने समस्याओं को लेकर एसडीएम बैजनाथ सलीम आजम के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन भेजा। हिमाचल घुमंतू पशुपालक महासंघ के अध्यक्ष राजकुमार भट्ट और सचिव पवना कुमारी ने कहा कि वे पुश्तों से भेड़-बकरी पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीन-चार वर्ष से खुर-मुंह तथा फुट रोट रोग के कारण बहुत सारी भेड़-बकरियां मर चुकी हैं।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में घुमंतू पशुपालकों को प्रशिक्षण और विशेष सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। जब वे ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में जाते हैं, तो पशुधन में जानलेवा बीमारियां फैलती हैं। महासभा पशुपालन विभाग से मांग की कि घुमंतू पशुधन को चिह्नित कर तुरंत टीकाकरण किया जाए। अधिवेशन में फैसला लिया कि यदि 15 दिन में मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो उन्हें मजबूरन संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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