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Kangra News: मोबाइल बन रहा खतरा, ऑनलाइन पढ़ाई के बाद नहीं छूट रही फोन की लत
Sat, 06 Sep 2025 05:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 06 Sep 2025 05:01 AM IST
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रे (कांगड़ा)। भारी बारिश से स्कूल बंद होने के कारण शिक्षक बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा हालांकि बच्चों के लिए स्कूलों में चलने वाली नियमित कक्षाओं का विकल्प है परंतु तीन से पांच साल तक के बच्चों के लिए कई-कई घंटों तक मोबाइल के सामने बैठना न सिर्फ मुश्किल है बल्कि उनके स्वास्थ्य व आंखों के लिए भी नुकसानदायक है। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों ने मोबाइल फोन का खूब उपयोग किया।लेकिन अब बरसात के मौसम में भी स्कूल बंद होने के कारण बच्चे ऑनलाइन क्लास लगा रहे है। ऑनलाइन क्लास समाप्त होने के बाद भी बच्चे मोबाइल फोन नहीं छोड़ रहे हैं, इस वजह से पढ़ाई के अलावा बच्चों में मोबाइल फोन देखने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। भारी बारिश के कारण घर पर रह कर बच्चों की मोबाइल फोन की लत नहीं छूट रही। इसको लेकर अभिभावक परेशान हैं। बच्चों को मोबाइल फोन से कैसे दूर रखा जाए, ज्यादातर माता-पिता इसका हल ढूंढने में जुटे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों का स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो रहा है जो अभिवावकों को एक चिंता का विषय बन रहा है।
ईशा चौधरी का कहना है कि मोबाइल फोन से निकलने वाली किरणों से कई बच्चों को नई बीमारी हो रही है। मोबाइल की लत इतनी बढ़ गई है कि यदि किसी बच्चे के हाथ से मोबाइल छीन लिया जाता है तो आक्रामक तक हो जाते हैं। पूनम शर्मा का कहना है कि इंटरनेट और डिवाइस की निर्भरता पर आज कल पढ़ाई हो रही है। कमजोर नेटवर्क या डिवाइस की खराबी से क्लास छूट सकती है। गांवों में यह बड़ी समस्या है।
मीनाक्षी का कहना है कि शारीरिक गतिविधि में कमी से बच्चे जूझ रहे हैं। स्कूल में खेल और दौड़-भाग होती थी, जो अब नहीं होती। बच्चे घंटों स्क्रीन के सामने बैठते हैं। इससे मोटापा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
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रवि कुमार का कहना है कि आंखों और दिमाग पर बहुत असर हो रहा है। बच्चे लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं जिसकी वजह से आंखों पर दबाव पड़ता है। सिरदर्द, थकान और तनाव जैसी समस्याएं भी आम हो जाती हैं।
पवन कालिया का कहना है कि सीखने में गहराई की कमी बहुत होती है। ऑनलाइन पढ़ाई में पर्सनल गाइडेंस कम होता है। बच्चे विषय को सतही तौर पर समझते हैं। गहन चर्चा और क्लासरूम इंटरएक्शन की कमी होती है।
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ईशा चौधरी का कहना है कि मोबाइल फोन से निकलने वाली किरणों से कई बच्चों को नई बीमारी हो रही है। मोबाइल की लत इतनी बढ़ गई है कि यदि किसी बच्चे के हाथ से मोबाइल छीन लिया जाता है तो आक्रामक तक हो जाते हैं। पूनम शर्मा का कहना है कि इंटरनेट और डिवाइस की निर्भरता पर आज कल पढ़ाई हो रही है। कमजोर नेटवर्क या डिवाइस की खराबी से क्लास छूट सकती है। गांवों में यह बड़ी समस्या है।
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मीनाक्षी का कहना है कि शारीरिक गतिविधि में कमी से बच्चे जूझ रहे हैं। स्कूल में खेल और दौड़-भाग होती थी, जो अब नहीं होती। बच्चे घंटों स्क्रीन के सामने बैठते हैं। इससे मोटापा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
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रवि कुमार का कहना है कि आंखों और दिमाग पर बहुत असर हो रहा है। बच्चे लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं जिसकी वजह से आंखों पर दबाव पड़ता है। सिरदर्द, थकान और तनाव जैसी समस्याएं भी आम हो जाती हैं।
पवन कालिया का कहना है कि सीखने में गहराई की कमी बहुत होती है। ऑनलाइन पढ़ाई में पर्सनल गाइडेंस कम होता है। बच्चे विषय को सतही तौर पर समझते हैं। गहन चर्चा और क्लासरूम इंटरएक्शन की कमी होती है।