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सोयाबीन की किस्में आम लोगों तक पहुंचाएं विशेषज्ञ : प्रो. नवीन
Sat, 22 Feb 2025 05:51 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 22 Feb 2025 05:51 AM IST
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कृषि विवि पालमपुर में कार्यशाला के समापन के बाद कुलपति प्रो. नवीन कुमार और प्रतिभागी। -स्रोत
पालमपुर (कांगड़ा)। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन कुमार ने कहा कि सोयाबीन एक उपयोगी और बहुउद्देशीय फसल है। यह मानव और पशुधन दोनों के लिए पोषण का अच्छा स्रोत है।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केंद्रों और संबंधित विभागों के माध्यम से सोयाबीन की उन्नत किस्मों और तकनीकों को किसानों और आमजन तक पहुंचाने का प्रयास करें। इससे न केवल इसकी उपयोगिता बढ़ेगी, बल्कि उत्पादन और वाणिज्य में भी वृद्धि होगी। वे विश्वविद्यालय में आयोजित ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (एआईसीआरपी) की 55वीं वार्षिक समूह बैठक के समापन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के निदेशक डॉ. केएच सिंह ने सोयाबीन उत्पादक राज्यों में नई किस्मों और तकनीकों पर हो रहे शोध कार्यों की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिकों से टोफू और दाल उत्पादन के लिए उपयुक्त सोयाबीन किस्मों पर विशेष ध्यान देने की अपील की। आयोजन सचिव डॉ. वेदना कुमारी ने बताया कि इस तीन दिवसीय बैठक में देशभर के विभिन्न राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, निजी क्षेत्र और नीति-निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
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उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केंद्रों और संबंधित विभागों के माध्यम से सोयाबीन की उन्नत किस्मों और तकनीकों को किसानों और आमजन तक पहुंचाने का प्रयास करें। इससे न केवल इसकी उपयोगिता बढ़ेगी, बल्कि उत्पादन और वाणिज्य में भी वृद्धि होगी। वे विश्वविद्यालय में आयोजित ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (एआईसीआरपी) की 55वीं वार्षिक समूह बैठक के समापन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के निदेशक डॉ. केएच सिंह ने सोयाबीन उत्पादक राज्यों में नई किस्मों और तकनीकों पर हो रहे शोध कार्यों की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिकों से टोफू और दाल उत्पादन के लिए उपयुक्त सोयाबीन किस्मों पर विशेष ध्यान देने की अपील की। आयोजन सचिव डॉ. वेदना कुमारी ने बताया कि इस तीन दिवसीय बैठक में देशभर के विभिन्न राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, निजी क्षेत्र और नीति-निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
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