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Kangra News: साझा जमीन पर निर्माण रोकने के आदेश, निचली अदालत का फैसला पलटा

Mon, 19 Oct 2026 07:09 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 07:09 AM IST
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Lower court's order to stop construction on shared land overturned
देहरा की अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सपना पांडे की अदालत ने दिए यथास्थिति के आदेश
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सभी पक्षकार अधिवक्ताओं के माध्यम से 27 नवंबर को निचली अदालत में उपस्थित होंगे

संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। साझा जमीन पर निर्माण और कब्जे को लेकर चल रहे विवाद में देहरा की अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सपना पांडे की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत के एक जनवरी 2025 के आदेश को निरस्त करते हुए जमीन की प्रकृति, निर्माण और कब्जे के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था मुख्य दीवानी मुकदमे के अंतिम फैसले तक लागू रहेगी।
मामला जसवां तहसील के अंतर्गत क्षेत्र में विनोद बनाम वेद व अन्य से संबंधित है। याचिका में आरोप लगाया था कि साझा जमीन पर उनके हिस्से से अधिक कब्जा किया जा रहा है। आरोप था कि जमीन पर पहले ही बैंक्वेट हॉल और आवास का निर्माण किया जा चुका है और अब जेसीबी से खोदाई कर सड़क की ओर की कीमती जमीन पर भी निर्माण करने की कोशिश की जा रही है। वादी ने जमीन का बंटवारा होने तक निर्माण कार्य रोकने की मांग की थी।
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प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जमीन पर सभी सह-हिस्सेदार आपसी व्यवस्था के अनुसार अपने-अपने हिस्से में काबिज हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2019-20 में आपसी सहमति से भवन का निर्माण किया गया था। मौजूदा निर्माण कार्य बारिश के दौरान भूस्खलन से भवन को बचाने के लिए सुरक्षा दीवार बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रतिवादी पक्ष ने यह भी कहा कि इससे अपीलकर्ता को कोई अपूर्णीय नुकसान नहीं होगा।
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अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि जमीन सभी पक्षों और अन्य सह-हिस्सेदारों के नाम संयुक्त रूप से दर्ज हैं तथा उसका विधिवत बंटवारा नहीं हुआ है। अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड में पक्षों के अलग-अलग हिस्सों पर विशिष्ट कब्जे का स्पष्ट उल्लेख भी नहीं है। जमीन के बंटवारे की कार्यवाही लंबित है।

अदालत ने सभी तथ्यों को जांचने के बाद माना कि मामले में प्रथम दृष्ट्या अपीलकर्ता का पक्ष बनता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल अंतरिम राहत से संबंधित है और इससे मुख्य मुकदमे के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही, पक्षकारों को अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से 27 नवंबर 2026 को संबंधित निचली अदालत में उपस्थित होने को कहा गया है।
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