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Kangra News: ऋण की किस्तें नहीं चुकाईं, अब होगी 79,659 रुपये की वसूली
Thu, 10 Sep 2026 07:10 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 10 Sep 2026 07:10 AM IST
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धर्मशाला। कांगड़ा की वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश अनिता शर्मा की अदालत ने ऋण अदायगी में चूक से जुड़े मामले में कैनरा बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 79,659 रुपये की वसूली की डिक्री पारित की है।
अदालत ने बकाया राशि पर 13.7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी बैंक के पक्ष में मंजूर किया है। यह फैसला कैनरा बैंक शाखा कार्यालय नगरोटा बगवां, जिला कांगड़ा से संबंधित है।
मामला वर्ष 2017 में दायर किया गया था और बैंक ने ऋण की बकाया राशि की वसूली के लिए अदालत का रुख किया था।
अदालत के समक्ष बैंक की ओर से बताया गया कि प्रतिवादी ने 23 अप्रैल 2015 को व्यवसाय स्थापित करने और मशीनरी और स्पेयर पार्ट्स खरीदने के लिए 80,000 रुपये के टर्म लोन के लिए आवेदन किया था। बैंक की ओर से आवश्यक जांच के बाद ऋण स्वीकृत किया गया।
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बैंक के अनुसार निर्धारित शर्तों के मुताबिक ऋण की अदायगी नहीं हुई। इसके बाद बैंक ने अदालत के समक्ष खाते का प्रमाणित स्टेटमेंट और अन्य ऋण दस्तावेज पेश किए। बैंक का दावा था कि 18 नवंबर 2017 तक 79,659 रुपये ब्याज सहित बकाया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि प्रतिवादी उन मुद्दों पर अपने पक्ष को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिनका भार उस पर था।
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अदालत ने बकाया राशि पर 13.7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी बैंक के पक्ष में मंजूर किया है। यह फैसला कैनरा बैंक शाखा कार्यालय नगरोटा बगवां, जिला कांगड़ा से संबंधित है।
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मामला वर्ष 2017 में दायर किया गया था और बैंक ने ऋण की बकाया राशि की वसूली के लिए अदालत का रुख किया था।
अदालत के समक्ष बैंक की ओर से बताया गया कि प्रतिवादी ने 23 अप्रैल 2015 को व्यवसाय स्थापित करने और मशीनरी और स्पेयर पार्ट्स खरीदने के लिए 80,000 रुपये के टर्म लोन के लिए आवेदन किया था। बैंक की ओर से आवश्यक जांच के बाद ऋण स्वीकृत किया गया।
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बैंक के अनुसार निर्धारित शर्तों के मुताबिक ऋण की अदायगी नहीं हुई। इसके बाद बैंक ने अदालत के समक्ष खाते का प्रमाणित स्टेटमेंट और अन्य ऋण दस्तावेज पेश किए। बैंक का दावा था कि 18 नवंबर 2017 तक 79,659 रुपये ब्याज सहित बकाया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि प्रतिवादी उन मुद्दों पर अपने पक्ष को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिनका भार उस पर था।