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Kangra News: टांडा में बीमारी से ज्यादा खराब लिफ्टें दे रहीं दर्द

Sat, 23 May 2026 12:33 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2026 12:33 AM IST
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Lifts in Tanda are causing pain worse than illness
टांडा में लिफ्ट खराब होने पर मरीजों को स्टेचर के सहारे रैंप से ले जाते हुए परिजन। जागरूक पाठक
धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में लंबे समय से लिफ्टें खराब पड़ी हैं लेकिन उन्हें ठीक नहीं किया जा रहा है। नई लिफ्टों को स्थापित करने का कार्य भी कछुआ चाल चल रहा है। इससे मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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लिफ्टें बंद होने के कारण स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर मरीजों को रैंप के माध्यम से ऊपर-नीचे ले जाना पड़ रहा है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज इस अव्यवस्था का सबसे अधिक शिकार हो रहे हैं। मरीजों को यहां-वहां ले जाने में तीमारदारों की सांस फूल रही है।
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अधिवक्ता के आरोप
अधिवक्ता सौरभ कौंडल ने इस मामले पर गंभीर आरोप लगाए कि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर रहने दिया जा रहा है ताकि आसपास के निजी अस्पतालों का कारोबार बढ़ सके। निजी अस्पतालों के संचालक कभी नहीं चाहेंगे कि सरकारी अस्पताल मजबूत और सुचारू रूप से कार्य करें। उन्होंने कहा कि अस्पताल की लिफ्टों को ठीक करवाने या नई लिफ्टें लगाने में किसी विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री की जेब से पैसा खर्च नहीं होता। यह जनता के टैक्स का पैसा होता है। इसके बावजूद जनता की बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने में इतनी देरी होना बेहद चिंताजनक है। अगर किसी वीआईपी की सुविधा प्रभावित होती है तो तुरंत कार्रवाई की जाती। मगर जनता की जिंदगी से जुड़ी सुविधाएं लंबे समय तक भगवान भरोसे छोड़ दी जाती हैं। यह केवल एक अस्पताल की समस्या नहीं, बल्कि प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर है।
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अस्पताल में नई लिफ्टों को स्थापित किया जा रहा है लेकिन लोक निर्माण विभाग के इलेक्ट्रिक विंग की ओर से काफी धीमी गति से कार्य किया जा रहा है। इसके लिए विभाग को पत्र भी लिखा गया है कि काम में तेजी लाई जाए ताकि मरीजों को परेशानी न हो। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज टांडा
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