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Kangra News: जमीन और पेड़ों ने रोकी सौर ऊर्जा संयंत्रों की राह

Sat, 22 Aug 2026 03:57 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Sat, 22 Aug 2026 03:57 AM IST
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Land and trees have blocked the path of solar power plants.

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धर्मशाला। जिले में ग्राउंड-माउंटेड (जमीन पर स्थापित होने वाले) सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की महत्वाकांक्षी योजना सरकारी भूमि की अनुपलब्धता और पेड़ों की मौजूदगी की अड़चनों में उलझती नजर आ रही है। हिमऊर्जा विभाग ने जिले में 20 स्थानों पर ऐसे सौर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। अब तक केवल सात साइटें ही चिह्नित की जा सकी हैं।
परियोजना के अनुसार प्रत्येक संयंत्र के निर्माण पर करीब दो करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके लिए पर्याप्त समतल भूमि के साथ-साथ अप्रोच रोड और 11 केवी विद्युत ट्रांसमिशन लाइन की नजदीकी कनेक्टिविटी होना अनिवार्य है। कई स्थानों पर सरकारी भूमि मिलने के बावजूद पेड़ों की अधिक संख्या, सड़क संपर्क का अभाव या बिजली लाइन की दूरी के कारण औपचारिकताएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
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इन सात स्थानों पर चिह्नित हुईं साइटें
लंज के समीप गुब्बर पंचायत में 500 किलोवाट क्षमता का सौर संयंत्र बनकर तैयार हो चुका है। मुहल पंचायत देहरा में संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। नूरपुर की पंजाड़ा, पालमपुर की थला ऊपरला, इंदौरा की बसंतपुर, कांगड़ा की रानीताल और बैजनाथ की सेहल पंचायत में जमीन चिह्नित की गई है। यहां तकनीकी व पर्यावरणीय मानकों की समीक्षा चल रही है। हिमऊर्जा विभाग प्रशासन और एसडीएम के समन्वय से उपयुक्त भूमि की तलाश में जुटा है ताकि शेष 13 साइटों को भी जल्द अंतिम रूप दिया जा सके।
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विभिन्न उपमंडलों में एसडीएम स्तर पर राजस्व अधिकारियों की मदद से उपयुक्त जमीन तलाशी जा रही है। प्रत्येक संयंत्र से सालाना लगभग आठ लाख यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। इससे संबंधित ग्राम पंचायत को प्रतिमाह करीब एक लाख रुपये की नियमित आय होने का अनुमान है, जिसका उपयोग गांव के विकास कार्यों में किया जाएगा। -अरुण भारद्वाज, परियोजना अधिकारी, हिमऊर्जा जिला कांगड़ा


विभिन्न उपमंडलों में एसडीएम स्तर पर राजस्व अधिकारियों की मदद से उपयुक्त जमीन तलाशी जा रही है। प्रत्येक संयंत्र से सालाना लगभग आठ लाख यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। इससे संबंधित ग्राम पंचायत को प्रतिमाह करीब एक लाख रुपये की नियमित आय होने का अनुमान है, जिसका उपयोग गांव के विकास कार्यों में किया जाएगा। -अरुण भारद्वाज, परियोजना अधिकारी, हिमऊर्जा जिला कांगड़ा
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