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Kangra News: श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजा ज्वालामुखी, रात 12 बजे मनाया जन्मोत्सव
Sun, 06 Sep 2026 07:46 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 06 Sep 2026 07:46 AM IST
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शक्तिपीठ ज्वालामुखी में स्थित कृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी मनाते पुजारी और श्रद्धालु । -संवाद
श्रद्धालुओं ने झुलाया कान्हा का पालना, मंदिरों में भजन-कीर्तन और भंडारे
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। विश्वविख्यात शक्तिपीठ ज्वालामुखी में जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही और ‘जय श्रीकृष्ण’ व ‘राधे-कृष्ण’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंदिरों में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना, हवन और भंडारों का आयोजन किया गया।
ज्वालामुखी मंदिर में शुक्रवार रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार मनाया गया। जन्म के बाद भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। पुजारी वर्ग ने देर रात तक भजन-कीर्तन कर भगवान का गुणगान किया।
जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, ठाकुरद्वारा सहित क्षेत्र के कई मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। मंदिर के निकासी द्वार पर भगवान श्रीकृष्ण का पालना लगाया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने मां ज्वालामुखी के दर्शन के बाद झुलाया।
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संस्कृत भवन स्थित राधा-कृष्ण कीर्तन भवन में भी विशेष पूजा हुई। पुजारी अविनेद्र शर्मा ने बताया कि यहां करीब 23 वर्षों से जन्माष्टमी उत्सव मनाया जा रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। विश्वविख्यात शक्तिपीठ ज्वालामुखी में जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही और ‘जय श्रीकृष्ण’ व ‘राधे-कृष्ण’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंदिरों में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना, हवन और भंडारों का आयोजन किया गया।
ज्वालामुखी मंदिर में शुक्रवार रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार मनाया गया। जन्म के बाद भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। पुजारी वर्ग ने देर रात तक भजन-कीर्तन कर भगवान का गुणगान किया।
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जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, ठाकुरद्वारा सहित क्षेत्र के कई मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। मंदिर के निकासी द्वार पर भगवान श्रीकृष्ण का पालना लगाया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने मां ज्वालामुखी के दर्शन के बाद झुलाया।
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संस्कृत भवन स्थित राधा-कृष्ण कीर्तन भवन में भी विशेष पूजा हुई। पुजारी अविनेद्र शर्मा ने बताया कि यहां करीब 23 वर्षों से जन्माष्टमी उत्सव मनाया जा रहा है।