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Kangra News: 4.42 लाख रुपये 9 फीसदी ब्याज सहित लौटाए बीमा कंपनी
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धर्मशाला। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने वाहन के क्लेम के संबंध में ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को वाहन का इंश्योरेंस करवाने के बावजूद दुर्घटना के बाद बीमा क्लेम देने से इनकार करने पर वाहन की मरम्मत पर खर्च हुई 4,42,893 रुपये की राशि को नौ फीसदी ब्याज दर सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा 40 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये न्यायालयी शुल्क देने के भी आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता आकाश पुत्र विजय निवासी वार्ड नंबर दो एमएस कन्वेंशन सेंटर पालमपुर ने बताया कि उन्होंने अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक सीमित के माध्यम से इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से करवाया था। इंश्योरेंस 9 फरवरी, 2018 से लेकर 8 फरवरी, 2019 तक वैध था। इस अवधि के बीच उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटना होने की सूचना बीमा कंपनी को दी और गाड़ी को वर्कशॉप में पहुंचा दिया। इसके बाद कंपनी की ओर से सर्वेयर नियुक्त किया, जिसने गाड़ी के टोटल लॉस की बात कही। इस दौरान उन्होंने गाड़ी के बीमा होने के चलते राशि के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें बीमा राशि नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज करवाया। आयोग ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर इंडिया इंश्योरेंस कंपनी प्रबंधन को आदेश दिए हैं कि उन्हें ग्राहक के 4,42,893 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने होंगे। इसके अलावा 40 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये न्यायालयी शुल्क देना होगा।
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जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता आकाश पुत्र विजय निवासी वार्ड नंबर दो एमएस कन्वेंशन सेंटर पालमपुर ने बताया कि उन्होंने अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक सीमित के माध्यम से इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से करवाया था। इंश्योरेंस 9 फरवरी, 2018 से लेकर 8 फरवरी, 2019 तक वैध था। इस अवधि के बीच उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटना होने की सूचना बीमा कंपनी को दी और गाड़ी को वर्कशॉप में पहुंचा दिया। इसके बाद कंपनी की ओर से सर्वेयर नियुक्त किया, जिसने गाड़ी के टोटल लॉस की बात कही। इस दौरान उन्होंने गाड़ी के बीमा होने के चलते राशि के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें बीमा राशि नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज करवाया। आयोग ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर इंडिया इंश्योरेंस कंपनी प्रबंधन को आदेश दिए हैं कि उन्हें ग्राहक के 4,42,893 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने होंगे। इसके अलावा 40 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये न्यायालयी शुल्क देना होगा।
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