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Kangra News: देवरानी-जेठानी की चुनावी जंग में निर्दलीयों ने बिछाई सियासी बिसात
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रोज बाला
विवेक कुमार
धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला के चुनावों में सचिवालय वार्ड चर्चा का केंद्र बना गया है। बुधवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन इस वार्ड से किसी भी प्रत्याशी ने अपना नाम वापस नहीं लिया। इसके चलते अब यहां रिश्तों में हो रही चुनावी जंग के बीच निर्दलीय प्रत्याशियों की एंट्री ने मुकाबले को पूरी तरह हॉटसीट में तब्दील कर दिया है।
इस वार्ड में मुख्य मुकाबला कांग्रेस की शिवानी और भाजपा की आशु के बीच माना जा रहा है, जो रिश्ते में देवरानी और जेठानी (मामा व बुआ की बहुएं) हैं। दोनों ही दलों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है। पारिवारिक रिश्तों के चुनावी अखाड़े में तब्दील होने से यहां की राजनीति काफी दिलचस्प हो गई है। रिश्तों के बीच चुनावी लड़ाई में दो निर्दलीय प्रत्याशियों, रेखा और रोज बाला ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है। नामांकन वापसी न होने के कारण अब शिवानी और आशु को न केवल आपसी पारिवारिक प्रतिद्वंद्विता का सामना करना होगा, बल्कि इन निर्दलीय उम्मीदवारों की चुनौती से भी पार पाना होगा। निर्दलीयों की दस्तक ने यहां मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है, जिससे जीत-हार का समीकरण उलझ गया है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सचिवालय वार्ड के मतदाता अपने परिवार की बहुओं में से किसी एक को चुनते हैं या फिर निर्दलीय प्रत्याशियों पर भरोसा जताकर उन्हें शहर की सत्ता तक पहुंचाते हैं। संवाद
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धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला के चुनावों में सचिवालय वार्ड चर्चा का केंद्र बना गया है। बुधवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन इस वार्ड से किसी भी प्रत्याशी ने अपना नाम वापस नहीं लिया। इसके चलते अब यहां रिश्तों में हो रही चुनावी जंग के बीच निर्दलीय प्रत्याशियों की एंट्री ने मुकाबले को पूरी तरह हॉटसीट में तब्दील कर दिया है।
इस वार्ड में मुख्य मुकाबला कांग्रेस की शिवानी और भाजपा की आशु के बीच माना जा रहा है, जो रिश्ते में देवरानी और जेठानी (मामा व बुआ की बहुएं) हैं। दोनों ही दलों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है। पारिवारिक रिश्तों के चुनावी अखाड़े में तब्दील होने से यहां की राजनीति काफी दिलचस्प हो गई है। रिश्तों के बीच चुनावी लड़ाई में दो निर्दलीय प्रत्याशियों, रेखा और रोज बाला ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है। नामांकन वापसी न होने के कारण अब शिवानी और आशु को न केवल आपसी पारिवारिक प्रतिद्वंद्विता का सामना करना होगा, बल्कि इन निर्दलीय उम्मीदवारों की चुनौती से भी पार पाना होगा। निर्दलीयों की दस्तक ने यहां मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है, जिससे जीत-हार का समीकरण उलझ गया है।
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अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सचिवालय वार्ड के मतदाता अपने परिवार की बहुओं में से किसी एक को चुनते हैं या फिर निर्दलीय प्रत्याशियों पर भरोसा जताकर उन्हें शहर की सत्ता तक पहुंचाते हैं। संवाद
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रोज बाला

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