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Kangra News: नूरपुर में राधा नहीं, मीरा संग विराजते हैं श्रीकृष्ण
Fri, 04 Sep 2026 01:55 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 04 Sep 2026 01:55 AM IST
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नूरपुर का बृजराज स्वामी मंदिर
नूरपुर (कांगड़ा)। नूरपुर की पहचान प्राचीन किले और समृद्ध इतिहास के साथ ऐतिहासिक श्री बृजराज स्वामी मंदिर से भी है।
नूरपुर किले में स्थित इस प्राचीन मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा नहीं बल्कि उनकी अनन्य भक्त मीरा बाई विराजमान हैं। कृष्ण और मीरा की प्रतिमाएं प्रेम और भक्ति के अनूठे संगम की झलक देती हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं। दूर-दराज से हजारों लोग भगवान श्री बृजराज स्वामी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वर्षभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहने वाले मंदिर में जन्माष्टमी पर पूरा परिसर कृष्णमय हो जाता है।
चित्तौड़गढ़ से नूरपुर पहुंचीं प्रतिमाएं
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार नूरपुर के राजा जगत सिंह चित्तौड़गढ़ के राजा के निमंत्रण पर वहां गए थे। रात्रि विश्राम के दौरान उन्हें समीप के मंदिर से घुंघरुओं और संगीत की आवाज सुनाई दी। मंदिर में झांकने पर उन्होंने एक महिला को भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने भजन गाते और नृत्य करते देखा।
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राजा ने इस घटना का उल्लेख अपने राजपुरोहित से किया। राजपुरोहित ने उन्हें चित्तौड़गढ़ से भगवान श्रीकृष्ण और मीरा की प्रतिमाएं नूरपुर लाने का सुझाव दिया। राजा जगत सिंह ने चित्तौड़गढ़ के राजा से इन प्रतिमाओं को उपहार में मांगा। चित्तौड़गढ़ के राजा ने श्रीकृष्ण और मीरा की प्रतिमाओं के साथ मौलश्री का पौधा भी भेंट किया।
नूरपुर लौटने के बाद राजा जगत सिंह ने अपने दरबार-ए-खास को मंदिर का स्वरूप देकर दोनों प्रतिमाओं की स्थापना करवाई। आज भी ये प्रतिमाएं मंदिर में श्रद्धा का प्रमुख केंद्र हैं।
कृष्ण लीलाओं का मनोहारी चित्रण
मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा काले संगमरमर और मीरा बाई की प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित बताई जाती है। राजस्थानी शैली की इन प्रतिमाओं के साथ मंदिर की भित्तियों पर भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का सुंदर चित्रण भी देखने को मिलता है।
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नूरपुर किले में स्थित इस प्राचीन मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा नहीं बल्कि उनकी अनन्य भक्त मीरा बाई विराजमान हैं। कृष्ण और मीरा की प्रतिमाएं प्रेम और भक्ति के अनूठे संगम की झलक देती हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं। दूर-दराज से हजारों लोग भगवान श्री बृजराज स्वामी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वर्षभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहने वाले मंदिर में जन्माष्टमी पर पूरा परिसर कृष्णमय हो जाता है।
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चित्तौड़गढ़ से नूरपुर पहुंचीं प्रतिमाएं
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार नूरपुर के राजा जगत सिंह चित्तौड़गढ़ के राजा के निमंत्रण पर वहां गए थे। रात्रि विश्राम के दौरान उन्हें समीप के मंदिर से घुंघरुओं और संगीत की आवाज सुनाई दी। मंदिर में झांकने पर उन्होंने एक महिला को भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने भजन गाते और नृत्य करते देखा।
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राजा ने इस घटना का उल्लेख अपने राजपुरोहित से किया। राजपुरोहित ने उन्हें चित्तौड़गढ़ से भगवान श्रीकृष्ण और मीरा की प्रतिमाएं नूरपुर लाने का सुझाव दिया। राजा जगत सिंह ने चित्तौड़गढ़ के राजा से इन प्रतिमाओं को उपहार में मांगा। चित्तौड़गढ़ के राजा ने श्रीकृष्ण और मीरा की प्रतिमाओं के साथ मौलश्री का पौधा भी भेंट किया।
नूरपुर लौटने के बाद राजा जगत सिंह ने अपने दरबार-ए-खास को मंदिर का स्वरूप देकर दोनों प्रतिमाओं की स्थापना करवाई। आज भी ये प्रतिमाएं मंदिर में श्रद्धा का प्रमुख केंद्र हैं।
कृष्ण लीलाओं का मनोहारी चित्रण
मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा काले संगमरमर और मीरा बाई की प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित बताई जाती है। राजस्थानी शैली की इन प्रतिमाओं के साथ मंदिर की भित्तियों पर भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का सुंदर चित्रण भी देखने को मिलता है।

नूरपुर का बृजराज स्वामी मंदिर