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Kangra News: फोरलेन की अवैध डंपिंग से भराल नदी के अस्तित्व को खतरा

Fri, 31 Mar 2023 11:40 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 31 Mar 2023 11:40 PM IST
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Illegal dumping of forelane threatens the existence of Bharal river
जसूर (कांगड़ा)। पठानकोट-मंडी फोरलेन कार्य के चलने से त्रिलोकपुर और सीयूनी क्षेत्र में सड़क के किनारे पहाड़ियों से खुदाई और मिट्टी की सामग्री को अस्थायी रूप से एक निजी भूमि पर फेंका जा रहा है, जो स्थानीय उपनदी से सटा है। इसके चलते स्थानीय भराल उपनदी के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा हो गया है। फोरलेन निर्माण कंपनी को खुदाई के दौरान निकाले गए मलबे को डंप करने के लिए कोई उचित अधिकृत डंपिंग साइट नहीं है, इसलिए त्रिलोकपुर और सीयूनी क्षेत्रों में गहरी खाईयों का उपयोग मलबे को निपटाने के लिए किया जा रहा है जो वैश्विक राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के निर्देशों के विपरीत है। इसके तहत किसी भी प्राकृतिक जल निकाय के पास भंडारण या कचरे की सामग्री को फेंकना प्रतिबंधित है, लेकिन पठानकोट-मंडी फोरलेन प्रोजेक्ट के चल रहे निर्माण में एनजीटी नियमों के उल्लंघन की जांच करने में स्थानीय अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संज्ञान ना लेने से स्थानीय निवासियों के बीच बहुत असंतोष है। इससे प्रभावित त्रिलोकपुर ग्राम पंचायत में इस अवैध डंपिंग से कई पुराने रास्ते, पुराने प्राकृतिक जल स्रोत और पंचायत में पाइप पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है। ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर के प्रधान दुर्गा दास और स्थानीय निवासियों ने फोरलेन निर्माण कंपनी की ओर से खुदाई की गई सामग्री के उचित निपटान की निगरानी के लिए एनएचएआई पालमपुर के अधिकारियों से आग्रह किया है कि पुराने प्राकृतिक जल स्रोतों के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए।
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पंचायत ने आरोप लगाया कि निर्माण कंपनी की ओर से फेंकने वाले कचरे की सामग्री और कटिंग के चलते तीन स्थानीय मार्ग, प्राकृतिक जल स्रोत और जल पंप घर का डंगा क्षतिग्रस्त हो गया है। ग्राम पंचायत ने पंचायत में एक प्रस्ताव पारित करके एनएचएआई निदेशक और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि खुदाई के दौरान गांव के रास्ते, पानी के प्राकृतिक स्त्रोत और वाटर पंप हाउस को नुकसान न पहुंचाया जाए। पंचायत के अनुसार एसडीएम जवाली ने भी स्थानीय पंचायत के क्षतिग्रस्त स्थानों की जांच की लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया।
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इस संबंध में महेंद्र प्रताप सिंह एसडीएम जवाली ने कहा कि मलबे को इन पंचायतों में फेंकने से रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। वहीं डीएफओ नूरपुर कुलदीप जम्वाल ने कहा कि मलबे को कोटला वन क्षेत्र के अंतर्गत फेंकने पर डैमेज रिपोर्ट बनाकर निर्माण कंपनी को जुर्माना जमा करवाने को कहा गया है। वहीं फील्ड स्टाफ को निर्देश जारी किए गए हैं कि वह वन क्षेत्र में मलबे फेंकने पर कड़ी नजर रखें।
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