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Kangra News: एचआरटीसी ने धर्मशाला बस अड्डा में बंद किया प्रवेश शुल्क चुकाना
Mon, 13 Oct 2025 05:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 13 Oct 2025 05:59 AM IST
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खास खबर...
लंबे समय से नए बस स्टैंड का निर्माण कार्य होने के चलते लिया निर्णय
पहले बस अड्डा में प्रवेश पर देना पड़ता था शुल्क
सचिन चौधरी
धर्मशाला। लंबे समय से बस अड्डा धर्मशाला का निर्माण कार्य शुरू न होने पर अब एचआरटीसी ने अड्डा में बसों का प्रवेश शुल्क देना बंद कर दिया है। करीब एक-डेढ़ माह से एचआरटीसी बस अड्डा में किसी भी बस का प्रवेश शुल्क ठेकेदार को नहीं दे रहा है। अब केवल निजी बस संचालक ही बस अड्डा में प्रवेश शुल्क भर रहे हैं। इससे ठेकेदार को रोजाना नुकसान झेलना पड़ा रहा है।
जानकारी के अनुसार रोजाना बस अड्डा धर्मशाला से परिवहन निगम की 76 बसें छोटे-बड़े रूटों के लिए रवाना होती हैं। वहीं, दिनभर 75 से 80 निजी बसों का भी संचालन बस अड्डा से ही होता है। रोजाना एक बस से प्रवेश शुल्क 65 रुपये लिया जाता है और बस को अड्डा में रात्रि ठहराव करवाना है तो उसके अलग से 50 रुपये प्रतिदिन देने पड़ते हैं। वर्षों से निगम की ओर से बस अड्डा में प्रवेश शुल्क तो ठेकेदार को दिया जा रहा है, लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी नए बस अड्डे का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
इस वजह से निगम के अधिकारियों-पदाधिकारियों में ठेकेदार और संबंधित कंपनी के प्रति रोष व्यक्त किया था और रोजाना प्रवेश शुल्क देने से इनकार कर दिया है। परिवहन निगम से रोजाना प्रवेश शुल्क न मिल पाने के कारण संबंधित ठेकेदार को एक माह में दो लाख रुपये से अधिक का घाटा झेलना पड़ रहा है। निगम का कहना है कि जब तक नए बस अड्डे का कार्य शुरू नहीं होगा, तब तक कोई शुल्क नहीं दिया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार आधुनिक अंतरराज्यीय बस अड्डा धर्मशाला का एक बार शिलान्यास, दो बार भूमि पूजन और अब पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली के नाम पर बस स्टैंड का नामकरण भी हो गया, लेकिन पिछले आठ साल में बस स्टैंड के नाम पर अभी तक महज डंगा ही लग पाया है। 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार में परिवहन मंत्री जीएस बाली और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने धर्मशाला बस स्टैंड की आधारशिला रखी थी। इसके बाद 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस बस अड्डे का भूमि पूजन किया। वहीं, मई 2023 में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने फिर से इस बस अड्डे का भूमि पूजन किया था। मगर इतने साल बीत जाने के बाद भी आज तक निर्माण के नाम पर एक ईंट तक नहीं लग पाई है। मौजूदा बस अड्डे की हालत काफी खस्ता हो गई है, जिससे यात्रियों के साथ कर्मचारियों को भी परेशानी हो रही है।
कोट्स...
- एक माह से बस अड्डा धर्मशाला में बसों का प्रवेश शुल्क देना बंद कर दिया गया है। सालों से बस अड्डे में प्रदेश शुल्क दे रहे थे, लेकिन सुविधाओं के नाम पर आज तक कुछ नहीं मिला। जब तक बस अड्डे का कार्य शुरू नहीं हो जाएगा, तब तक एक भी बस का शुल्क ठेकेदार को नहीं दिया जाएगा। - अजय वर्मा, उपाध्यक्ष, एचआरटीसी
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लंबे समय से नए बस स्टैंड का निर्माण कार्य होने के चलते लिया निर्णय
पहले बस अड्डा में प्रवेश पर देना पड़ता था शुल्क
सचिन चौधरी
धर्मशाला। लंबे समय से बस अड्डा धर्मशाला का निर्माण कार्य शुरू न होने पर अब एचआरटीसी ने अड्डा में बसों का प्रवेश शुल्क देना बंद कर दिया है। करीब एक-डेढ़ माह से एचआरटीसी बस अड्डा में किसी भी बस का प्रवेश शुल्क ठेकेदार को नहीं दे रहा है। अब केवल निजी बस संचालक ही बस अड्डा में प्रवेश शुल्क भर रहे हैं। इससे ठेकेदार को रोजाना नुकसान झेलना पड़ा रहा है।
जानकारी के अनुसार रोजाना बस अड्डा धर्मशाला से परिवहन निगम की 76 बसें छोटे-बड़े रूटों के लिए रवाना होती हैं। वहीं, दिनभर 75 से 80 निजी बसों का भी संचालन बस अड्डा से ही होता है। रोजाना एक बस से प्रवेश शुल्क 65 रुपये लिया जाता है और बस को अड्डा में रात्रि ठहराव करवाना है तो उसके अलग से 50 रुपये प्रतिदिन देने पड़ते हैं। वर्षों से निगम की ओर से बस अड्डा में प्रवेश शुल्क तो ठेकेदार को दिया जा रहा है, लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी नए बस अड्डे का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
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इस वजह से निगम के अधिकारियों-पदाधिकारियों में ठेकेदार और संबंधित कंपनी के प्रति रोष व्यक्त किया था और रोजाना प्रवेश शुल्क देने से इनकार कर दिया है। परिवहन निगम से रोजाना प्रवेश शुल्क न मिल पाने के कारण संबंधित ठेकेदार को एक माह में दो लाख रुपये से अधिक का घाटा झेलना पड़ रहा है। निगम का कहना है कि जब तक नए बस अड्डे का कार्य शुरू नहीं होगा, तब तक कोई शुल्क नहीं दिया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार आधुनिक अंतरराज्यीय बस अड्डा धर्मशाला का एक बार शिलान्यास, दो बार भूमि पूजन और अब पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली के नाम पर बस स्टैंड का नामकरण भी हो गया, लेकिन पिछले आठ साल में बस स्टैंड के नाम पर अभी तक महज डंगा ही लग पाया है। 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार में परिवहन मंत्री जीएस बाली और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने धर्मशाला बस स्टैंड की आधारशिला रखी थी। इसके बाद 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस बस अड्डे का भूमि पूजन किया। वहीं, मई 2023 में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने फिर से इस बस अड्डे का भूमि पूजन किया था। मगर इतने साल बीत जाने के बाद भी आज तक निर्माण के नाम पर एक ईंट तक नहीं लग पाई है। मौजूदा बस अड्डे की हालत काफी खस्ता हो गई है, जिससे यात्रियों के साथ कर्मचारियों को भी परेशानी हो रही है।
कोट्स...
- एक माह से बस अड्डा धर्मशाला में बसों का प्रवेश शुल्क देना बंद कर दिया गया है। सालों से बस अड्डे में प्रदेश शुल्क दे रहे थे, लेकिन सुविधाओं के नाम पर आज तक कुछ नहीं मिला। जब तक बस अड्डे का कार्य शुरू नहीं हो जाएगा, तब तक एक भी बस का शुल्क ठेकेदार को नहीं दिया जाएगा। - अजय वर्मा, उपाध्यक्ष, एचआरटीसी