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निकाय और पंचायत चुनाव टालने की कोशिश में सुक्खू सरकार : भाजपा

Mon, 25 Aug 2025 03:53 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Aug 2025 03:53 AM IST
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Hitlerite Sukhu government worked to postpone elections: Sandipani
धर्मशाला में पत्रकार वार्ता करते हुए भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज, संजय शर्मा, प्रदेश मीडिया
धर्मशाला। हिटलरी सुक्खू सरकार नगर निकाय और पंचायत चुनाव को लटकाने का प्रयास कर रही है। यह समझ से परे है कि प्रदेश सरकार ऐसा क्यों कर रही है। यह बात भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज, संजय शर्मा और प्रदेश मीडिया प्रभारी करण नंदा, सह-मीडिया प्रभारी विश्व चक्षु ने धर्मशाला में एक संयुक्त पत्रकारवार्ता में कही।
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उन्होंने कहा कि पिछले साल सेब की फल को नदी-नालों में बहाने पर सुक्खू सरकार ने बागवानों पर लाखों रुपये में जुर्माना लगाया था। इस बार एचपीएमसी का सेब ही सड़क के किनारे सड़ रहा है। मगर मुख्यमंत्री और बागबानी मंत्री किसे जुर्माना लगाएंगे। उन्होंने कहा कि पनाला में जयराम सरकार ने कोल्ड स्टोर और प्रोसेसिंग प्लांट खोला था, मगर अब उसे भी उपयोग में नहीं लाया जा रहा है।
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वहीं, उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को बनाने में कांगड़ा का अहम स्थान रहा है। भाजपा के समय कांगड़ा से चार-चार मंत्री थे, जबकि कांग्रेस सरकार ने कांगड़ा को अधिमान ही नहीं दिया। चुनाव के समय कांग्रेस ने महिलाओं को 1500 रुपये देने की बात कही थी, वह भी महिलाएं को नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी के लिए पेंशन तक का पक्का बंदोबस्त कर दिया है।
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भाजपा प्रवक्ता संदीपनी ने कहा कि केंद्रीय विवि के धर्मशाला परिसर को प्रदेश सरकार 30 करोड़ नहीं दे पा रही है, जबकि देहरा में बिजली-पानी की व्यवस्था के लिए 13 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। देशभर में कथित वोट चोरी को लेकर मचे घमासान पर उन्होंने कहा कि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार है, क्या यहां कांग्रेस सरकार चोरी के वोटों से बनी है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रदेश की आपदा के लिए करीब 7000 करोड़ रुपये जारी किया है। इसमें से प्रदेश सरकार अभी तक मात्र 300 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी है। मुख्यमंत्री क्षतिग्रस्त मकानों का सात लाख रुपये देने की घोषणा कर रहे हैं, जबकि यह सारी घोषणाएं केंद्र की ओर से दिए गए आपदा राहत के पैसे से की जा रही हैं। उन्होंने कोर्ट द्वारा अवैध कब्जों को हटाने बारे कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल की पैरवी ही ढंग से नहीं कर पाई, जिसके चलते यह हाई कोर्ट ने यह निर्णय दिया है।
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