{"_id":"67aa518d5c9cdd664103a2e9","slug":"garbage-for-people-plastic-shining-like-gold-in-ravis-eyes-kangra-news-c-399-sml1046-260890-2025-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: लोगों के लिए कचरा, रवि की आंखों में सोना बन चमक रहा प्लास्टिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: लोगों के लिए कचरा, रवि की आंखों में सोना बन चमक रहा प्लास्टिक
विज्ञापन
धर्मशाला। घरों से रोजाना निकलने वाले कचरे को जहां लोग बेकार समझ कर इधर-उधर फेंक देते हैं, उसी कचरे को धर्मशाला के रक्कड़ के रवि ठाकुर सोने में तबदील कर रहे हैं। रवि रक्कड़ प्लांट में विभिन्न पंचायतों का कचरा एकत्रित कर उसे सीमेंट प्लांट सोलन और राजस्थान भेज रहे हैं। इसके अलावा नगरी में भी एक प्लांट चला रहे है, जहां प्लास्टिक को दोबारा प्रयोग कर उससे उत्पाद बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अन्य कचरे को खाद में तबदील किया जा रहा है। कचरे को 13 अलग-अलग वर्गाें में बांट कर उसे कमाई का जरिया बनाया है। इससे जहां रवि ठाकुर ने अपनी आर्थिकी को मजबूत किया है, वहीं क्षेत्र के 14 के करीब अन्य लोगों को भी रोजगार मुहैया करवाया है।
जानकारी के अनुसार विकास खंड धर्मशाला के तहत आती कुछ ग्राम पंचायतों में जहां घर-घर जाकर कूड़ा एकत्रित करने का कार्य शुरू हो चुका है, वहीं अब प्रदेश सरकार ने भी सूबे की हर पंचायत से घर-घर से कचरा उठाने की बात कही है। कचरे को निष्पादित करने के लिए हर पंचायत में प्लांट लगाने की बात कही जा रही है, लेकिन कई पंचायतों में इस प्लांट की छवि खराब बनी हुई है। लेकिन, अब लोगों का नजरिया बदल रहा है।
इन वर्गाें में बांटा जा रहा कचरा
विभिन्न पंचायतों से कचरा एकत्रित करने के बाद रवि की कृष्णा प्लास्टिक इंडस्ट्री 13 अलग-अलग वर्गाें में उसे निष्पादित करती है। इन वर्गों में गत्ता, कागज, रंग-बिरंगी बोतलें, मिक्स प्लास्टिक, टीन-डिब्बे, कपड़ा, कैरी बैग, कुरकुरे-चिप्स आदि के पैकेट, टैरा प्लास्टिक, पोलीथीन, शीशा, प्लेट और जूते आदि शामिल हैं।
विज्ञापन
हमारी प्लास्टिक इंडस्ट्री का छह पंचायतों के साथ कचरे को उठाने के लिए एमओयू साइन हुआ है। हमारे कर्मचारी हर पंचायत में एक दिन जाते हैं और लोगों की ओर से दिए कचरे को लाते हैं। इसके बाद इसे अपने प्लांट में निष्पादित किया जाता है, जिसे सोलन और राजस्थान स्थित सीमेंट प्लांट के लिए भेजा जाता है। अब 300 टन के करीब प्लास्टिक को इन सीमेंट प्लांटों में भेजा चुका है। इसके अलावा अपने ही प्लांट में कई प्रकार के उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं।
- रवि ठाकुर, लोकल इंटरप्रिन्योर
धर्मशाला के रक्कड़ गांव के रवि ठाकुर ने कचरे को ‘सोने’ में तबदील कर एक अनोखा उदाहरण पेश किया है। वह घर-घर से इकट्ठा किए गए कचरे को पुनः प्रयोग योग्य बनाने और उसे मूल्यवर्धित करने के काम में लगे हुए हैं। रवि ठाकुर ने अपनी कृष्णा प्लास्टिक इंडस्ट्री में विभिन्न पंचायतों का कचरा एकत्रित करके उसे सीमेंट प्लांटों में भेजने के साथ-साथ प्लास्टिक से विभिन्न उत्पाद भी तैयार किए हैं।
विभिन्न प्रकार के कचरे को 13 अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनका पुनर्चक्रण किया जाता है। इनमें गत्ता, कागज, रंगीन बोतलें, मिक्स प्लास्टिक, टीन-डिब्बे, कपड़ा, कैरी बैग, कुरकुरे-चिप्स के पैकेट, टैरा प्लास्टिक, पोलीथीन, शीशा, प्लेट और जूते शामिल हैं। इसके अलावा, रवि ठाकुर ने 300 टन प्लास्टिक को सीमेंट प्लांटों में भेजा है, जिससे प्लास्टिक का पुनर्चक्रण कर उसका उपयोग सीमेंट निर्माण में किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान रवि ठाकुर ने 14 लोगों को रोजगार भी दिया है। उनका यह प्रयास न केवल कचरे का पुनर्चक्रण करके पर्यावरण को बचाने में मदद कर रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहा है। इस पहल से अब लोगों का नजरिया भी कचरे के प्रति बदलने लगा है और कचरे को एक संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है। रवि ठाकुर ने बताया कि उनकी इंडस्ट्री ने छह पंचायतों के साथ कचरे को इकट्ठा करने के लिए एमओयू साइन किया है और उनके कर्मचारी नियमित रूप से इन पंचायतों से कचरा इकट्ठा करते हैं।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार विकास खंड धर्मशाला के तहत आती कुछ ग्राम पंचायतों में जहां घर-घर जाकर कूड़ा एकत्रित करने का कार्य शुरू हो चुका है, वहीं अब प्रदेश सरकार ने भी सूबे की हर पंचायत से घर-घर से कचरा उठाने की बात कही है। कचरे को निष्पादित करने के लिए हर पंचायत में प्लांट लगाने की बात कही जा रही है, लेकिन कई पंचायतों में इस प्लांट की छवि खराब बनी हुई है। लेकिन, अब लोगों का नजरिया बदल रहा है।
विज्ञापन
इन वर्गाें में बांटा जा रहा कचरा
विभिन्न पंचायतों से कचरा एकत्रित करने के बाद रवि की कृष्णा प्लास्टिक इंडस्ट्री 13 अलग-अलग वर्गाें में उसे निष्पादित करती है। इन वर्गों में गत्ता, कागज, रंग-बिरंगी बोतलें, मिक्स प्लास्टिक, टीन-डिब्बे, कपड़ा, कैरी बैग, कुरकुरे-चिप्स आदि के पैकेट, टैरा प्लास्टिक, पोलीथीन, शीशा, प्लेट और जूते आदि शामिल हैं।
विज्ञापन
हमारी प्लास्टिक इंडस्ट्री का छह पंचायतों के साथ कचरे को उठाने के लिए एमओयू साइन हुआ है। हमारे कर्मचारी हर पंचायत में एक दिन जाते हैं और लोगों की ओर से दिए कचरे को लाते हैं। इसके बाद इसे अपने प्लांट में निष्पादित किया जाता है, जिसे सोलन और राजस्थान स्थित सीमेंट प्लांट के लिए भेजा जाता है। अब 300 टन के करीब प्लास्टिक को इन सीमेंट प्लांटों में भेजा चुका है। इसके अलावा अपने ही प्लांट में कई प्रकार के उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं।
- रवि ठाकुर, लोकल इंटरप्रिन्योर
धर्मशाला के रक्कड़ गांव के रवि ठाकुर ने कचरे को ‘सोने’ में तबदील कर एक अनोखा उदाहरण पेश किया है। वह घर-घर से इकट्ठा किए गए कचरे को पुनः प्रयोग योग्य बनाने और उसे मूल्यवर्धित करने के काम में लगे हुए हैं। रवि ठाकुर ने अपनी कृष्णा प्लास्टिक इंडस्ट्री में विभिन्न पंचायतों का कचरा एकत्रित करके उसे सीमेंट प्लांटों में भेजने के साथ-साथ प्लास्टिक से विभिन्न उत्पाद भी तैयार किए हैं।
विभिन्न प्रकार के कचरे को 13 अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनका पुनर्चक्रण किया जाता है। इनमें गत्ता, कागज, रंगीन बोतलें, मिक्स प्लास्टिक, टीन-डिब्बे, कपड़ा, कैरी बैग, कुरकुरे-चिप्स के पैकेट, टैरा प्लास्टिक, पोलीथीन, शीशा, प्लेट और जूते शामिल हैं। इसके अलावा, रवि ठाकुर ने 300 टन प्लास्टिक को सीमेंट प्लांटों में भेजा है, जिससे प्लास्टिक का पुनर्चक्रण कर उसका उपयोग सीमेंट निर्माण में किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान रवि ठाकुर ने 14 लोगों को रोजगार भी दिया है। उनका यह प्रयास न केवल कचरे का पुनर्चक्रण करके पर्यावरण को बचाने में मदद कर रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहा है। इस पहल से अब लोगों का नजरिया भी कचरे के प्रति बदलने लगा है और कचरे को एक संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है। रवि ठाकुर ने बताया कि उनकी इंडस्ट्री ने छह पंचायतों के साथ कचरे को इकट्ठा करने के लिए एमओयू साइन किया है और उनके कर्मचारी नियमित रूप से इन पंचायतों से कचरा इकट्ठा करते हैं।