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अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे ललेहड़ गांव के लोग
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काँगड़ा के कच्छियारी में फोरलेन के विरोध में धरने बैठकर रोष जताते हुए ललेहड़ गांव के लोग।
- फोटो : Kangra
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कांगड़ा। फोरलेन की जद में आने से चिंतित ललेहड़ गांव के करीब एक दर्जन से ज्यादा परिवारों के सदस्य कच्छियारी में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। इन लोगों ने रोष जताते हुए कहा कि पहले वह बांध की वजह से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। जैसे-तैसे उन्होंने अपने आशियाने यहां बना लिए तो उन्हें फिर उजाड़ा जा रहा है।
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें 22 जुलाई को नोटिस दिया गया है कि उनके करीब पंद्रह मकान मटौर शिमला फोरलेन में आ रहे हैं। ऐसे में साठ दिनों के भीतर वह अपने मकान खाली कर दें। धरने पर बैठे सतीश कुमार और मदन लाल ने बताया कि वर्ष 1971 में ये परिवार विस्थापित होकर यहां आए थे। अब दोबारा उन्हें विस्थापित किया जा रहा है। सरकार इस फोरलेन को दूसरी ओर से भी ले जा सकती है। एनएच के उच्चाधिकारियों की टीम उनके मकानों के बजाय साथ लगती बंजर जगह का उपयोग फोरलेन के लिए कर सकती है।
वीर सिंह, अजय कुमार, पवन कुमार और मेघ सिंह ने बताया कि सरकार जो मुआवजा उन्हें दे रही है, उससे तो वे जमीन भी नहीं खरीद सकते हैं। सरकार साथ लगती बंजर जमीन पर फोरलेन बनाए। धरने पर बैठी सरोज कुमारी, सुमन बाला, रानी देवी, मोनिका, दीपिका, चंचला, बिनता देवी और शास्त्री देवी ने कहा कि फोरलेन की वजह से उनके मकान उजड़ जाएंगे। जिलाधीश से मिलने के बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई है। एनएच के अधिकारी जब तक नहीं आते, उनका धरना जारी रहेगा। अगर उनकी मांग को अनसुना किया गया, तो वह और बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
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बार-बार विस्थापित करना ठीक नहीं, ठोस उपाय निकालेंगे : जयराम
शिमला। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांगड़ा से कांग्रेस विधायक पवन काजल ने फोरलेन के चलते विस्थापित होने वाले परिवारों की दुहाई देते हुए फोरलने को दूसरी जगह से बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि फोरलेन निर्माण के चलते ललेहड़ के करीब 15 परिवारों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ेगा। पहले ही ये परिवार पौंग बांध के चलते विस्थापित हो चुके हैं। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को बार-बार विस्थापित करना ठीक नहीं है। इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। इसके लिए ठोस उपाय निकाला जाएगा। ब्यूरो
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धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें 22 जुलाई को नोटिस दिया गया है कि उनके करीब पंद्रह मकान मटौर शिमला फोरलेन में आ रहे हैं। ऐसे में साठ दिनों के भीतर वह अपने मकान खाली कर दें। धरने पर बैठे सतीश कुमार और मदन लाल ने बताया कि वर्ष 1971 में ये परिवार विस्थापित होकर यहां आए थे। अब दोबारा उन्हें विस्थापित किया जा रहा है। सरकार इस फोरलेन को दूसरी ओर से भी ले जा सकती है। एनएच के उच्चाधिकारियों की टीम उनके मकानों के बजाय साथ लगती बंजर जगह का उपयोग फोरलेन के लिए कर सकती है।
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वीर सिंह, अजय कुमार, पवन कुमार और मेघ सिंह ने बताया कि सरकार जो मुआवजा उन्हें दे रही है, उससे तो वे जमीन भी नहीं खरीद सकते हैं। सरकार साथ लगती बंजर जमीन पर फोरलेन बनाए। धरने पर बैठी सरोज कुमारी, सुमन बाला, रानी देवी, मोनिका, दीपिका, चंचला, बिनता देवी और शास्त्री देवी ने कहा कि फोरलेन की वजह से उनके मकान उजड़ जाएंगे। जिलाधीश से मिलने के बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई है। एनएच के अधिकारी जब तक नहीं आते, उनका धरना जारी रहेगा। अगर उनकी मांग को अनसुना किया गया, तो वह और बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
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शिमला। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांगड़ा से कांग्रेस विधायक पवन काजल ने फोरलेन के चलते विस्थापित होने वाले परिवारों की दुहाई देते हुए फोरलने को दूसरी जगह से बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि फोरलेन निर्माण के चलते ललेहड़ के करीब 15 परिवारों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ेगा। पहले ही ये परिवार पौंग बांध के चलते विस्थापित हो चुके हैं। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को बार-बार विस्थापित करना ठीक नहीं है। इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। इसके लिए ठोस उपाय निकाला जाएगा। ब्यूरो