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Kangra News: चेक बाउंस के मामले में दोषी को चार माह की कैद
Mon, 06 Apr 2026 06:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 06 Apr 2026 06:26 AM IST
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धर्मशाला। अदालत ने चेक बाउंस के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए चार माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक दंडाधिकारी धर्मशाला प्रथम श्रेणी वरुण की अदालत ने दोषी को शिकायतकर्ता महिला को एक लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। यदि दोषी मुआवजा राशि का भुगतान करने में विफल रहता है तो उसे 15 दिन की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।
अदालत में पेश तथ्यों के अनुसार धर्मशाला की एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके पति और आरोपी के बीच मित्रतापूर्ण संबंध थे। इसी दोस्ती के नाते आरोपी ने फरवरी 2019 में अपनी घरेलू जरूरतों का हवाला देकर उनसे 80,000 रुपये उधार लिए थे। बार-बार पैसे मांगने पर जब आरोपी ने राशि वापस नहीं की तो अंततः 29 अक्टूबर 2019 को उसने 80,000 रुपये का एक पोस्ट-डेटेड चेक जारी किया।
शिकायतकर्ता ने जब चेक बैंक में जमा करवाया तो 31 अक्तूबर 2019 को यह क्रेडिट सीमा से अधिक होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद 27 नवंबर 2019 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसे उसने प्राप्त भी किया लेकिन निर्धारित 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी ने जानबूझकर राशि नहीं लौटाई। इसी आधार पर अदालत ने दोषी को जेल की सजा और मुआवजे का फरमान सुनाया।
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अदालत में पेश तथ्यों के अनुसार धर्मशाला की एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके पति और आरोपी के बीच मित्रतापूर्ण संबंध थे। इसी दोस्ती के नाते आरोपी ने फरवरी 2019 में अपनी घरेलू जरूरतों का हवाला देकर उनसे 80,000 रुपये उधार लिए थे। बार-बार पैसे मांगने पर जब आरोपी ने राशि वापस नहीं की तो अंततः 29 अक्टूबर 2019 को उसने 80,000 रुपये का एक पोस्ट-डेटेड चेक जारी किया।
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शिकायतकर्ता ने जब चेक बैंक में जमा करवाया तो 31 अक्तूबर 2019 को यह क्रेडिट सीमा से अधिक होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद 27 नवंबर 2019 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसे उसने प्राप्त भी किया लेकिन निर्धारित 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी ने जानबूझकर राशि नहीं लौटाई। इसी आधार पर अदालत ने दोषी को जेल की सजा और मुआवजे का फरमान सुनाया।
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