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फोरलेन की जद में आने वाले भवनों के मुआवजे पर डेप्रिसिएशन भी लगेगा
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जसूर (कांगड़ा)। फोरलेन प्रभावितों को दिए जाने वाले मुआवजे के कथित अन्यायपूर्ण आवंटन के बाद चार दर्जन कस्बों के 3781 परिवारों को भवनों के मुआवजे में भी सरकार बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में है। भवनों के लिए 2018 में तत्कालीन जिला प्रशासन व भूमि मुआवजा अधिकारी नूरपुर की ओर से तय किया गया मुआवजा क्रमश: 59000, 53000 व 48000 प्रति स्क्वेयर मीटर को सरकार ने नकार दिया है। अब भवनों का मुआवजा सीपीडब्ल्यूडी के मानकों के अनुसार दिया जाना तय किया गया है।
यह विभाग तयशुदा रेट के तहत भवनों के निर्माण अवधि के अनुसार भवनों की डेप्रिसिएशन कटौती भी इसमें शामिल करेगा। इसके चलते भवनों के दाम 2018 के मानकों से पांच गुना कम मिलने जा रहे हैं। इसके चलते फोरलेन प्रभावित खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। भवनों के कथित मुआवजे को लेकर फोरलेन संघर्ष समिति के अध्यक्ष दरबारी सिंह व महासचिव विजय ने रोष जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से 2018 में प्रस्तावित 59 हजार प्रति स्क्वेयर मीटर मुआवजा बढ़ाने के बजाय उसे 14 से 18000 प्रति स्क्वेयर मीटर के मुताबिक दिया जा रहा है और उसमें भी डेप्रिसिएशन की कटौती की जाएगी।
कहा कि यह रेट उन्हें किसी प्रकार से मान्य नहीं है। प्रभावित लोग इन दरों पर अपने भवनों व इमारतों को हाथ नहीं लगाने देंगे। वहीं, फोरलेन मानवाधिकार लोक बॉडी के अध्यक्ष राजेश पठानिया ने कहा कि एनएच किनारे की बहुमूल्य व कॉमर्शियल जमीन व भवनों को सरकार कौड़ियों के मोल से छीनने जा रही है।
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भवनों के रेट सीपीडब्ल्यूडी मानकों के अनुसार दिए जाएंगे और डेप्रिसिएशन नियम भी लागू होंगे। भवन का मुआवजा कितना मिलेगा, यह भवन के आकार और केस टू केस निर्धारित होगा। जवाली क्षेत्र में अधिग्रहीत किए भवनों का मुआवजा रिलीज कर दिया गया है। जबकि नूरपुर क्षेत्र में भवन परिसरों की मुआवजा राशि जल्द जारी की जाएगी। - कर्नल अनिल सेन, प्रोजेक्ट निदेशक फोरलेन परियोजना पालनपुर।
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यह विभाग तयशुदा रेट के तहत भवनों के निर्माण अवधि के अनुसार भवनों की डेप्रिसिएशन कटौती भी इसमें शामिल करेगा। इसके चलते भवनों के दाम 2018 के मानकों से पांच गुना कम मिलने जा रहे हैं। इसके चलते फोरलेन प्रभावित खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। भवनों के कथित मुआवजे को लेकर फोरलेन संघर्ष समिति के अध्यक्ष दरबारी सिंह व महासचिव विजय ने रोष जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से 2018 में प्रस्तावित 59 हजार प्रति स्क्वेयर मीटर मुआवजा बढ़ाने के बजाय उसे 14 से 18000 प्रति स्क्वेयर मीटर के मुताबिक दिया जा रहा है और उसमें भी डेप्रिसिएशन की कटौती की जाएगी।
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कहा कि यह रेट उन्हें किसी प्रकार से मान्य नहीं है। प्रभावित लोग इन दरों पर अपने भवनों व इमारतों को हाथ नहीं लगाने देंगे। वहीं, फोरलेन मानवाधिकार लोक बॉडी के अध्यक्ष राजेश पठानिया ने कहा कि एनएच किनारे की बहुमूल्य व कॉमर्शियल जमीन व भवनों को सरकार कौड़ियों के मोल से छीनने जा रही है।
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भवनों के रेट सीपीडब्ल्यूडी मानकों के अनुसार दिए जाएंगे और डेप्रिसिएशन नियम भी लागू होंगे। भवन का मुआवजा कितना मिलेगा, यह भवन के आकार और केस टू केस निर्धारित होगा। जवाली क्षेत्र में अधिग्रहीत किए भवनों का मुआवजा रिलीज कर दिया गया है। जबकि नूरपुर क्षेत्र में भवन परिसरों की मुआवजा राशि जल्द जारी की जाएगी। - कर्नल अनिल सेन, प्रोजेक्ट निदेशक फोरलेन परियोजना पालनपुर।