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Kangra News: विश्राम गृहों की सेवाएं निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में वन विभाग
Sun, 14 Sep 2025 09:06 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 14 Sep 2025 09:06 AM IST
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धर्मशाला। वन विभाग अब अपने विश्राम गृहों में केटरिंग और हॉस्पिटैलिटी (खानपान और आतिथ्य) की व्यवस्था निजी हाथों को सौंपने जा रहा है। पहले चरण में धर्मशाला वन वृत्त के अंतर्गत आने वाले त्रियूंड और सतोवरी विश्राम गृहों की सेवाओं को आउटसोर्स (किराये) पर दिया जाएगा। इसके लिए विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह फैसला विभागीय स्टाफ की कमी के कारण लिया गया है। विभाग की ओर से यह शर्त रखी गई है कि केवल हिमाचली लोग ही इन विश्राम गृहों की सेवाओं को किराये पर ले सकेंगे, ताकि पर्यटकों को स्थानीय व्यंजन और स्वाद उपलब्ध करवाया जा सके। आउटसोर्स के तहत केवल हाउसकीपिंग और कैटरिंग सेवाएं निजी हाथों को सौंपी जाएंगी, जबकि विश्राम गृहों का संचालन और रखरखाव विभाग के अधीन ही रहेगा।
धर्मशाला वन वृत्त के तहत कुल 45 विश्राम गृह आते हैं, जिनमें धीरे-धीरे इस मॉडल को लागू किया जाएगा। शुरुआत त्रियूंड और सतोवरी विश्राम गृह से हो रही है। त्रियूंड विश्राम गृह में तीन कमरे, रसोईघर और बाथरूम की सुविधा है, जबकि सतोवरी विश्राम गृह में छह कमरे, दो टेंट और एक ट्री हाउस उपलब्ध है।
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इन विश्राम गृहों में आने वाले आगंतुकों से हाउसकीपिंग सेवाओं के लिए 200 से 300 रुपये लिए जाएंगे। रसोईघर का मासिक शुल्क 3 हजार रुपये तय किया गया है। सफाई संबंधी सामग्री का खर्च बोलीदाता को स्वयं उठाना होगा। इच्छुक बोलीदाता 15 से 25 सितंबर तक आवेदन पत्र डीएफओ कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं। बोली जमा करवाने की अंतिम तिथि 26 सितंबर दोपहर 2 बजे तक निर्धारित है। इसी दिन ढाई बजे डीएफओ कार्यालय में मूल्यांकन समिति की उपस्थिति में बोली खोली जाएगी।
ईको टूरिज्म सोसायटी के दिशानिर्देशों के तहत धर्मशाला वन वृत्त के त्रियूंड और सतोवरी विश्राम गृह की केटरिंग और हॉस्पिटैलिटी सर्विस को आउटसोर्स किया जा रहा है। विश्राम गृह की देखरेख विभाग स्वयं करेगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। -बासु कौशल, मुख्य अरण्यपाल, वन वृत्त धर्मशाला
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यह फैसला विभागीय स्टाफ की कमी के कारण लिया गया है। विभाग की ओर से यह शर्त रखी गई है कि केवल हिमाचली लोग ही इन विश्राम गृहों की सेवाओं को किराये पर ले सकेंगे, ताकि पर्यटकों को स्थानीय व्यंजन और स्वाद उपलब्ध करवाया जा सके। आउटसोर्स के तहत केवल हाउसकीपिंग और कैटरिंग सेवाएं निजी हाथों को सौंपी जाएंगी, जबकि विश्राम गृहों का संचालन और रखरखाव विभाग के अधीन ही रहेगा।
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धर्मशाला वन वृत्त के तहत कुल 45 विश्राम गृह आते हैं, जिनमें धीरे-धीरे इस मॉडल को लागू किया जाएगा। शुरुआत त्रियूंड और सतोवरी विश्राम गृह से हो रही है। त्रियूंड विश्राम गृह में तीन कमरे, रसोईघर और बाथरूम की सुविधा है, जबकि सतोवरी विश्राम गृह में छह कमरे, दो टेंट और एक ट्री हाउस उपलब्ध है।
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इन विश्राम गृहों में आने वाले आगंतुकों से हाउसकीपिंग सेवाओं के लिए 200 से 300 रुपये लिए जाएंगे। रसोईघर का मासिक शुल्क 3 हजार रुपये तय किया गया है। सफाई संबंधी सामग्री का खर्च बोलीदाता को स्वयं उठाना होगा। इच्छुक बोलीदाता 15 से 25 सितंबर तक आवेदन पत्र डीएफओ कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं। बोली जमा करवाने की अंतिम तिथि 26 सितंबर दोपहर 2 बजे तक निर्धारित है। इसी दिन ढाई बजे डीएफओ कार्यालय में मूल्यांकन समिति की उपस्थिति में बोली खोली जाएगी।
ईको टूरिज्म सोसायटी के दिशानिर्देशों के तहत धर्मशाला वन वृत्त के त्रियूंड और सतोवरी विश्राम गृह की केटरिंग और हॉस्पिटैलिटी सर्विस को आउटसोर्स किया जा रहा है। विश्राम गृह की देखरेख विभाग स्वयं करेगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। -बासु कौशल, मुख्य अरण्यपाल, वन वृत्त धर्मशाला