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Kangra News: समय पर न पहचानने से छोटा रह सकता है बच्चे का कद

Fri, 08 May 2026 01:51 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 01:51 AM IST
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Failure to identify the condition on time can lead to a child's short stature.
एआई जेनरेटेड फोटो
धर्मशाला। समय पर शॉर्ट स्टेचर (छोटा कद) समस्या की पहचान न होने से बच्चे का कद स्थायी रूप से छोटा रह सकता है। इसे बाद में किसी भी चिकित्सा पद्धति से ठीक नहीं किया जा सकता। यह बात डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता ने कही।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में शॉर्ट स्टेचर की समस्या को लेकर जागरूकता का अभाव है। अकसर माता-पिता यह मानकर बच्चों की कम लंबाई को नजरअंदाज कर देते हैं कि बच्चे का कद भविष्य में खुद बड़ा हो जाएगा। लेकिन यह धारणा बच्चों के भविष्य के लिए घातक हो सकती है।
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डॉ. अतुल गुप्ता ने 5 वर्षों से हिमाचल में शॉर्ट स्टेचर पर गहन शोध और डाटा एकत्रित किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति विविध है। यहां कुछ क्षेत्रों में लोग लंबे हैं तो अधिकांश में मध्यम कद के हैं। जागरूकता की कमी के कारण हिमाचल में छोटे कद की समस्या का सही आकलन नहीं हो पाता। लोग इसे केवल आनुवंशिक मानकर बैठ जाते हैं।
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यह है पैमाना
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों के विकास को पैमानों पर जरूर मापें। 4 वर्ष की आयु तक बच्चे की न्यूनतम लंबाई 100 सेमी होनी चाहिए। 4 से 8 वर्ष की आयु के बच्चे का कद हर साल कम से कम 5 सेमी बढ़ना अनिवार्य है। 8 वर्ष की आयु में एक स्वस्थ बच्चे की अनुमानित लंबाई 125 सेमी होनी चाहिए। यदि बच्चा इन मानकों को पूरा नहीं कर रहा है तो बिना देरी किए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

टांडा में हिमाचल का पहला और एकमात्र क्लीनिक

डॉ. अतुल गुप्ता के प्रयासों से टांडा मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में स्थापित यह क्लीनिक हिमाचल का पहला और एकमात्र समर्पित सुपरस्पेशियलिटी सेंटर है। इस क्लीनिक की स्थापना के बाद अब हिमाचली परिवारों को जटिल हार्मोनल बीमारियों के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली नहीं जाना पड़ता। क्लीनिक की मुख्य सुविधाओं में व्यवस्थित प्रोटोकॉल है। यहां बच्चों के कद की जांच के लिए डॉ. गुप्ता की ओर से डिजाइन किया गया विशेष प्रोटोकॉल है जहां चरणबद्ध तरीके से जांच की जाती है।
टांडा में यह भी सुविधा
ग्रोथ हार्मोन थेरेपी : वर्तमान में लगभग 30 बच्चे यहां ''''''''ग्रोथ हार्मोन'''''''' उपचार ले रहे हैं। ये बच्चे हर महीने सुधार दिखा रहे हैं।
जटिल रोगों का समाधान: क्लीनिक में टाइप-1 डायबिटीज, थायराॅइड और समय से पहले या देरी से यौवन आने जैसी समस्याओं का विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध है।
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