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सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बढ़ा रहा तनाव : अनुराग
Sun, 24 May 2026 11:14 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 24 May 2026 11:14 PM IST
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कांगड़ा। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, तुलना की भावना और साथियों के बीच खुद को बेहतर साबित करने की होड़ विद्यार्थियों में तनाव बढ़ा रही है। घर से दूर रहने वाले छात्रों में अकेलापन और निराशा की समस्या भी देखने को मिल रही है। यह बात जीएवी स्कूल कांगड़ा में आयोजित सीबीएसई कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन अनुराग शर्मा ने कही।
रविवार को विद्यालय में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। प्रधानाचार्य डॉ. सुरेश शर्मा ने रिसोर्स पर्सन अनुराग शर्मा और मनोज जोशी का परिचय करवाया। अनुराग शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों पर परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। प्रतियोगिता और भविष्य को लेकर चिंता के कारण छात्र मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
मनोज जोशी ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकेतों में पढ़ाई में रुचि कम होना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन, अत्यधिक थकान और नींद से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। आत्मविश्वास में कमी और नकारात्मक सोच भी विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय है।
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उन्होंने शिक्षकों को सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को भावनाएं खुलकर साझा करने के लिए प्रेरित किया जाए। संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए जरूरी बताया। साथ ही मोबाइल और सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित कर रचनात्मक गतिविधियों में समय देने पर जोर दिया। कार्यशाला में नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित करने की आवश्यकता भी बताई गई।
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रविवार को विद्यालय में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। प्रधानाचार्य डॉ. सुरेश शर्मा ने रिसोर्स पर्सन अनुराग शर्मा और मनोज जोशी का परिचय करवाया। अनुराग शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों पर परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। प्रतियोगिता और भविष्य को लेकर चिंता के कारण छात्र मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
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मनोज जोशी ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकेतों में पढ़ाई में रुचि कम होना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन, अत्यधिक थकान और नींद से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। आत्मविश्वास में कमी और नकारात्मक सोच भी विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय है।
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उन्होंने शिक्षकों को सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को भावनाएं खुलकर साझा करने के लिए प्रेरित किया जाए। संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए जरूरी बताया। साथ ही मोबाइल और सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित कर रचनात्मक गतिविधियों में समय देने पर जोर दिया। कार्यशाला में नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित करने की आवश्यकता भी बताई गई।