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Kangra News: सड़क हादसे में दिव्यांग हुए पूर्व सैनिक को मिलेगा 59.31 लाख का मुआवजा
Mon, 04 May 2026 06:40 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 04 May 2026 06:40 AM IST
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धर्मशाला। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण देहरा की अदालत ने एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर 100 फीसदी दिव्यांगता का दंश झेल रहे पूर्व सैनिक के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सपना पांडे की अदालत ने पीड़ित को 59,31,496 रुपये का मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं।
तहसील देहरा गोपीपुर निवासी याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि 16 जनवरी 2010 को वह अपनी बाइक पर सवार होकर मां बगलामुखी मंदिर जा रहे थे। दोपहर करीब 1 बजे डगूहर मोड़ के पास सामने से आ रही एक तेज रफ्तार टैक्सी उनकी बाइक से टकरा गई। इस हादसे में याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं।
दुर्घटना के समय याचिकाकर्ता की आयु मात्र 28 वर्ष थी और वह भारतीय सेना में सिपाही के पद पर कार्यरत थे। हादसे ने न केवल उनका करियर छीन लिया, बल्कि वह पूरी तरह बिस्तर पर आ गए। मेडिकल बोर्ड ने भी उनके 100 फीसदी दिव्यांग होने की पुष्टि की है। वर्तमान में उनकी स्थिति ऐसी है कि उन्हें अपनी दैनिक देखभाल के लिए दो सहायकों की आवश्यकता पड़ती है।
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सुनवाई के दौरान अधिकरण ने पाया कि दुर्घटना पूरी तरह से टैक्सी चालक की लापरवाही का परिणाम थी। विशेष बात यह रही कि मामले की सुनवाई के दौरान चालक और वाहन मालिक अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके चलते उन्हें एकतरफा करार दिया गया। अदालत ने बीमा कंपनी को कड़े निर्देश दिए हैं कि वह 59.31 लाख रुपये की कुल मुआवजा राशि पर याचिका दायर करने की तारीख से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान सुनिश्चित करे।
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तहसील देहरा गोपीपुर निवासी याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि 16 जनवरी 2010 को वह अपनी बाइक पर सवार होकर मां बगलामुखी मंदिर जा रहे थे। दोपहर करीब 1 बजे डगूहर मोड़ के पास सामने से आ रही एक तेज रफ्तार टैक्सी उनकी बाइक से टकरा गई। इस हादसे में याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं।
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दुर्घटना के समय याचिकाकर्ता की आयु मात्र 28 वर्ष थी और वह भारतीय सेना में सिपाही के पद पर कार्यरत थे। हादसे ने न केवल उनका करियर छीन लिया, बल्कि वह पूरी तरह बिस्तर पर आ गए। मेडिकल बोर्ड ने भी उनके 100 फीसदी दिव्यांग होने की पुष्टि की है। वर्तमान में उनकी स्थिति ऐसी है कि उन्हें अपनी दैनिक देखभाल के लिए दो सहायकों की आवश्यकता पड़ती है।
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सुनवाई के दौरान अधिकरण ने पाया कि दुर्घटना पूरी तरह से टैक्सी चालक की लापरवाही का परिणाम थी। विशेष बात यह रही कि मामले की सुनवाई के दौरान चालक और वाहन मालिक अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके चलते उन्हें एकतरफा करार दिया गया। अदालत ने बीमा कंपनी को कड़े निर्देश दिए हैं कि वह 59.31 लाख रुपये की कुल मुआवजा राशि पर याचिका दायर करने की तारीख से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान सुनिश्चित करे।