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Kangra News: सही पोषण, व्यायाम और हार्मोन पर भी निर्भर करती बच्चे की लंबाई
Thu, 17 Sep 2026 02:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 17 Sep 2026 02:01 AM IST
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बच्चा
धर्मशाला। आधुनिक जीवनशैली, जंक फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक गतिविधियों में कमी, अनियमित दिनचर्या और अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के शारीरिक व हार्मोनल विकास में बड़ी बाधा बन रहे हैं। इसके चलते कम उम्र में ही बच्चों की सामान्य शारीरिक वृद्धि और लंबाई प्रभावित हो रही है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज (टांडा) के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता के अनुसार, बच्चे का कद केवल आनुवंशिकी (माता-पिता के कद) पर निर्भर नहीं करता; सही पोषण, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मानसिक स्वास्थ्य और हार्मोनों का उचित संतुलन भी इसके लिए बेहद आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि थायरॉइड, ग्रोथ हार्मोन की कमी, कुपोषण और कुछ आनुवंशिक विकार बच्चों के शारीरिक विकास की गति को धीमा कर सकते हैं। समय रहते पहचान होने पर इन समस्याओं का प्रभावी उपचार संभव है। उन्होंने अभिभावकों को सुझाव दिया कि बच्चे की लंबाई में अपेक्षित वृद्धि न दिखने पर किशोरावस्था का इंतजार करने के बजाय बचपन में ही सतर्क हो जाएं। हर छह माह में बच्चे की लंबाई मापकर उसका रिकॉर्ड रखें।
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जंक फूड से मोटापा और पोषण की कमी
जंक फूड में अत्यधिक नमक, चीनी और वसा होती है। वृद्धि के लिए जरूरी प्रोटीन, विटामिन, खनिज और फाइबर नगण्य होते हैं। लगातार ऐसे आहार से बच्चों में मोटापा, दांतों की बीमारियां और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।
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विशेषज्ञ की सलाह
बच्चों की दैनिक डाइट में घर का बना ताजा खाना, मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, दूध-दही, अंडे और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जाएं। शीतल पेय (कोल्ड ड्रिंक्स) और पैकेटबंद मीठे पेय पदार्थों के स्थान पर सादा पानी, छाछ या दूध को प्राथमिकता दें। खान-पान पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के बजाय जंक फूड की मात्रा और आवृत्ति सीमित करना अधिक व्यावहारिक उपाय है। इसके अलावा बच्चों को रोजाना मैदानी खेलकूद के लिए प्रेरित करना जरूरी है।
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टांडा के पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में सुविधाएं
टांडा मेडिकल कॉलेज स्थित पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में छोटे कद और शारीरिक विकास से जुड़ी समस्याओं के लिए विशेष जांच व परामर्श की व्यवस्था उपलब्ध है। रक्त जांच, हार्मोनल प्रोफाइलिंग, पोषण संबंधी मार्गदर्शन और दवाओं के जरिए इलाज किया जाता है। उपचार के प्रभाव का आकलन करने के लिए हर तीन महीने में बच्चे की वृद्धि की समीक्षा होती है। अब तक 250 से अधिक बच्चों की समय पर जांच और उपचार कर उन्हें उनकी संभावित प्राकृतिक लंबाई प्राप्त करने में मदद दी जा चुकी है।
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज (टांडा) के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता के अनुसार, बच्चे का कद केवल आनुवंशिकी (माता-पिता के कद) पर निर्भर नहीं करता
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उन्होंने बताया कि थायरॉइड, ग्रोथ हार्मोन की कमी, कुपोषण और कुछ आनुवंशिक विकार बच्चों के शारीरिक विकास की गति को धीमा कर सकते हैं। समय रहते पहचान होने पर इन समस्याओं का प्रभावी उपचार संभव है। उन्होंने अभिभावकों को सुझाव दिया कि बच्चे की लंबाई में अपेक्षित वृद्धि न दिखने पर किशोरावस्था का इंतजार करने के बजाय बचपन में ही सतर्क हो जाएं। हर छह माह में बच्चे की लंबाई मापकर उसका रिकॉर्ड रखें।
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जंक फूड से मोटापा और पोषण की कमी
जंक फूड में अत्यधिक नमक, चीनी और वसा होती है। वृद्धि के लिए जरूरी प्रोटीन, विटामिन, खनिज और फाइबर नगण्य होते हैं। लगातार ऐसे आहार से बच्चों में मोटापा, दांतों की बीमारियां और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।
विशेषज्ञ की सलाह
बच्चों की दैनिक डाइट में घर का बना ताजा खाना, मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, दूध-दही, अंडे और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जाएं। शीतल पेय (कोल्ड ड्रिंक्स) और पैकेटबंद मीठे पेय पदार्थों के स्थान पर सादा पानी, छाछ या दूध को प्राथमिकता दें। खान-पान पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के बजाय जंक फूड की मात्रा और आवृत्ति सीमित करना अधिक व्यावहारिक उपाय है। इसके अलावा बच्चों को रोजाना मैदानी खेलकूद के लिए प्रेरित करना जरूरी है।
टांडा के पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में सुविधाएं
टांडा मेडिकल कॉलेज स्थित पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में छोटे कद और शारीरिक विकास से जुड़ी समस्याओं के लिए विशेष जांच व परामर्श की व्यवस्था उपलब्ध है। रक्त जांच, हार्मोनल प्रोफाइलिंग, पोषण संबंधी मार्गदर्शन और दवाओं के जरिए इलाज किया जाता है। उपचार के प्रभाव का आकलन करने के लिए हर तीन महीने में बच्चे की वृद्धि की समीक्षा होती है। अब तक 250 से अधिक बच्चों की समय पर जांच और उपचार कर उन्हें उनकी संभावित प्राकृतिक लंबाई प्राप्त करने में मदद दी जा चुकी है।