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Kangra News: फाइलों में दौड़ रहे ई-रिक्शा सड़क पर उतरने का इंतजार
Thu, 17 Sep 2026 01:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 17 Sep 2026 01:59 AM IST
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धर्मशाला। जिला मुख्यालय धर्मशाला और इसके साथ लगते सीमांत क्षेत्रों को सुगम सार्वजनिक परिवहन सेवा से जोड़ने के लिए प्रस्तावित 35 ई-रिक्शा संचालन की योजना प्रदेश सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद भी अधर में लटकी हुई है। जिन संकरे मार्गों और उपनगरीय बस्तियों तक आज तक नियमित सरकारी बस सेवा नहीं पहुंच पाई है, वहां के बाशिंदों को इस पर्यावरण-अनुकूल और किफायती लास्ट-माइल कनेक्टिविटी का लंबे समय से इंतजार है। हालांकि, प्रशासनिक फाइलों और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के फेर में उलझने के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर उतरने का इंतजार कर रही है।
योजना का मुख्य उद्देश्य शहर से सटे उन आवासीय इलाकों को सार्वजनिक परिवहन तंत्र से जोड़ना है, जहां बड़ी बसें मोड़ और संकरी गलियों के कारण नहीं पहुंच पाती हैं। ई-रिक्शा सेवा शुरू होने से श्यामनगर, रामनगर और आसपास के सीमांत क्षेत्रों के निवासियों को रोजमर्रा के आवागमन के लिए एक सस्ता और सुगम साधन मिलने की आस बंधी थी। खासकर स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, कामकाजी महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दैनिक रूप से कोतवाली बाजार व कचहरी आने-जाने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
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सीमांत इलाकों में परिवहन का संकट
श्यामनगर और रामनगर जैसे इलाकों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आबादी में भारी इजाफा हुआ है लेकिन उस अनुपात में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क विकसित नहीं हो सका है। नियमित बस सेवा न होने के कारण स्थानीय लोगों को मुख्य बाजार तक पहुंचने के लिए लंबा पैदल रास्ता तय करना पड़ता है या फिर निजी टैक्सियों पर निर्भर रहना पड़ता है। महज दो से तीन किलोमीटर के फासले के लिए उन्हें 150 से 200 रुपये तक का भारी टैक्सी किराया चुकाना पड़ रहा है।
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व्यापार मंडल ने कई बार उठाई मांग
व्यापार मंडल कोतवाली बाजार के अध्यक्ष अनुज कश्यप ने बताया कि शहर में ई-रिक्शा के नियमित संचालन को लेकर व्यापार मंडल का प्रतिनिधिमंडल कई बार जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मिल चुका है। हर बार यही आश्वासन मिलता है कि सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और राज्य स्तर से विस्तृत एसओपी जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस औपचारिकता को जल्द पूरा कर ई-रिक्शा सड़कों पर उतारे जाएं।
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जिला मुख्यालय धर्मशाला में 35 ई-रिक्शा चलाने की योजना को सरकार की ओर से सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की जा चुकी है। इसके संचालन, रूट निर्धारण और नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देशों व एसओपी का इंतजार किया जा रहा है। सरकार से अंतिम निर्देश मिलते ही योजना को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा। -हेमराज बैरवा, उपायुक्त, कांगड़ा
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योजना का मुख्य उद्देश्य शहर से सटे उन आवासीय इलाकों को सार्वजनिक परिवहन तंत्र से जोड़ना है, जहां बड़ी बसें मोड़ और संकरी गलियों के कारण नहीं पहुंच पाती हैं। ई-रिक्शा सेवा शुरू होने से श्यामनगर, रामनगर और आसपास के सीमांत क्षेत्रों के निवासियों को रोजमर्रा के आवागमन के लिए एक सस्ता और सुगम साधन मिलने की आस बंधी थी। खासकर स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, कामकाजी महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दैनिक रूप से कोतवाली बाजार व कचहरी आने-जाने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
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सीमांत इलाकों में परिवहन का संकट
श्यामनगर और रामनगर जैसे इलाकों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आबादी में भारी इजाफा हुआ है लेकिन उस अनुपात में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क विकसित नहीं हो सका है। नियमित बस सेवा न होने के कारण स्थानीय लोगों को मुख्य बाजार तक पहुंचने के लिए लंबा पैदल रास्ता तय करना पड़ता है या फिर निजी टैक्सियों पर निर्भर रहना पड़ता है। महज दो से तीन किलोमीटर के फासले के लिए उन्हें 150 से 200 रुपये तक का भारी टैक्सी किराया चुकाना पड़ रहा है।
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व्यापार मंडल ने कई बार उठाई मांग
व्यापार मंडल कोतवाली बाजार के अध्यक्ष अनुज कश्यप ने बताया कि शहर में ई-रिक्शा के नियमित संचालन को लेकर व्यापार मंडल का प्रतिनिधिमंडल कई बार जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मिल चुका है। हर बार यही आश्वासन मिलता है कि सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और राज्य स्तर से विस्तृत एसओपी जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस औपचारिकता को जल्द पूरा कर ई-रिक्शा सड़कों पर उतारे जाएं।
जिला मुख्यालय धर्मशाला में 35 ई-रिक्शा चलाने की योजना को सरकार की ओर से सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की जा चुकी है। इसके संचालन, रूट निर्धारण और नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देशों व एसओपी का इंतजार किया जा रहा है। सरकार से अंतिम निर्देश मिलते ही योजना को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा। -हेमराज बैरवा, उपायुक्त, कांगड़ा