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ईको-टूरिज्म से संरक्षित होगी हिमाचल की वन संपदा : के थिरुमल
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कार्यशाला में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर दिया जोर
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने के उद्देश्य से शनिवार को धर्मशाला में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें ईको-टूरिज्म की संभावनाओं, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ने तथा प्रदेश की प्राकृतिक और वन संपदा के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। हिमाचल प्रदेश कैडर के भारतीय वन सेवा अधिकारी के. थिरुमल ने ईको-टूरिज्म के सतत विकास की संभावनाओं पर विचार साझा किए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता को देखते हुए ईको-टूरिज्म को पर्यावरण संरक्षण के साथ विकसित किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलने के साथ वे पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़ सकेंगे।
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कार्यशाला में कम्युनिटी फॉरेस्ट्री की भूमिका पर भी चर्चा हुई। स्थानीय समुदायों को ईको-टूरिज्म गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने को महत्वपूर्ण बताया गया।
ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से आयोजित कार्यशाला में ईको-टूरिज्म और कम्युनिटी फॉरेस्ट्री से जुड़े अधिकारी तथा प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन मॉडल विकसित करना रहा।
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने के उद्देश्य से शनिवार को धर्मशाला में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें ईको-टूरिज्म की संभावनाओं, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ने तथा प्रदेश की प्राकृतिक और वन संपदा के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। हिमाचल प्रदेश कैडर के भारतीय वन सेवा अधिकारी के. थिरुमल ने ईको-टूरिज्म के सतत विकास की संभावनाओं पर विचार साझा किए।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता को देखते हुए ईको-टूरिज्म को पर्यावरण संरक्षण के साथ विकसित किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलने के साथ वे पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़ सकेंगे।
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कार्यशाला में कम्युनिटी फॉरेस्ट्री की भूमिका पर भी चर्चा हुई। स्थानीय समुदायों को ईको-टूरिज्म गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने को महत्वपूर्ण बताया गया।
ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से आयोजित कार्यशाला में ईको-टूरिज्म और कम्युनिटी फॉरेस्ट्री से जुड़े अधिकारी तथा प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन मॉडल विकसित करना रहा।