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Kangra News: बच्चों में बार-बार दांतों के दर्द को न करें अनदेखा
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धर्मशाला। बच्चों के स्वास्थ्य में बरती गई थोड़ी सी भी लापरवाही भविष्य में गंभीर शारीरिक व मानसिक समस्याओं का कारण बन सकती है। दांतों में दर्द, कमजोर दृष्टि या बार-बार पेट खराब होने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर अनदेखा करना बच्चों के समुचित विकास में बाधक बनता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन में ही सही स्वास्थ्य आदतें विकसित करने से बच्चों को दीर्घकालिक रोगों से बचाया जा सकता है जिसमें अभिभावकों के साथ-साथ विद्यालयों की सहभागिता भी अनिवार्य है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि मीठे पेय, चॉकलेट, बिस्कुट और टॉफी के अत्यधिक सेवन से बच्चों में कैविटी और मसूड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने दिन में दो बार, विशेषकर रात को सोने से पहले ब्रश करने की सलाह दी। साथ ही दूध के दांतों की समय रहते देखभाल पर जोर दिया, क्योंकि वे स्थायी दांतों के सही विकास के लिए आधार तैयार करते हैं।
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इसके अलावा, स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की दृष्टि प्रभावित हो रही है। बार-बार आंखें मलना, सिरदर्द या बोर्ड देखने में कठिनाई कमजोर नजर के सीधे संकेत हैं। विशेषज्ञों ने गैजेट्स के सीमित उपयोग और आउटडोर खेलकूद को जरूरी बताया। दूषित पानी और खानपान से होने वाले पेट संक्रमण से बचाव के लिए साबुन से हाथ धोने, हरी पत्तेदार सब्जियों व फाइबरयुक्त संतुलित आहार अपनाने की अपील की गई।
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बचपन में स्वास्थ्य संबंधी अच्छी आदतें डालने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर बनाया जा सकता है। दांत में दर्द, मसूड़ों से खून, आंखों में खिंचाव या लगातार पेट दर्द व उल्टी-दस्त को सामान्य न समझें। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें और बच्चों को जंक फूड के बजाय पौष्टिक व फाइबरयुक्त आहार दें। -डॉ. अतुल गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज टांडा
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विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन में ही सही स्वास्थ्य आदतें विकसित करने से बच्चों को दीर्घकालिक रोगों से बचाया जा सकता है जिसमें अभिभावकों के साथ-साथ विद्यालयों की सहभागिता भी अनिवार्य है।
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि मीठे पेय, चॉकलेट, बिस्कुट और टॉफी के अत्यधिक सेवन से बच्चों में कैविटी और मसूड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने दिन में दो बार, विशेषकर रात को सोने से पहले ब्रश करने की सलाह दी। साथ ही दूध के दांतों की समय रहते देखभाल पर जोर दिया, क्योंकि वे स्थायी दांतों के सही विकास के लिए आधार तैयार करते हैं।
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इसके अलावा, स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की दृष्टि प्रभावित हो रही है। बार-बार आंखें मलना, सिरदर्द या बोर्ड देखने में कठिनाई कमजोर नजर के सीधे संकेत हैं। विशेषज्ञों ने गैजेट्स के सीमित उपयोग और आउटडोर खेलकूद को जरूरी बताया। दूषित पानी और खानपान से होने वाले पेट संक्रमण से बचाव के लिए साबुन से हाथ धोने, हरी पत्तेदार सब्जियों व फाइबरयुक्त संतुलित आहार अपनाने की अपील की गई।
बचपन में स्वास्थ्य संबंधी अच्छी आदतें डालने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर बनाया जा सकता है। दांत में दर्द, मसूड़ों से खून, आंखों में खिंचाव या लगातार पेट दर्द व उल्टी-दस्त को सामान्य न समझें। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें और बच्चों को जंक फूड के बजाय पौष्टिक व फाइबरयुक्त आहार दें। -डॉ. अतुल गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज टांडा