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बस चार या पांच दिन फिर पूरी तरह से सूख जाएगी डलझील
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फाइल फोटो 20 मार्च को रिसाव के कारण कम होता मैक्लोडगंज की पवित्र डलझील का पानी
- फोटो : Kangra
धर्मशाला। धार्मिक आस्था का केंद्र मैक्लोडगंज की पवित्र डल झील से हो रहे पानी के रिसाव के कारण सूखने की कगार पर पहुंच गई है। हालत यह है कि चार या पांच दिन में झील पूरी तरह से सूख जाएगी। रिसाव और बढ़ती गर्मी के साथ अब इसी गाद भी सूखकर कर पत्थर बनने लगी है। इस झील के रिसाव को रोकने के लिए कई सरकारी एजेंसियां दम लगा चुकी हैं और काम में करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन हासिल कुछ नहीं हो पाया है।
हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों के लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक मैक्लोडगंज की डलझील अनदेखी के चलते पूरी तरह से सूख जाएगी। डल झील के रिसाव रोकने के लिए स्थानीय लोग भी कई बार सरकार और प्रशासन से गुहार लगा चुके है, लेकिन अभी तक इसका सही हल नहीं निकल पाया है।
बाकायदा प्रशासन ने झील से हो रहे रिसाव का अध्ययन भी करवाया था कि किस स्थान पर रिसाव हो रहा है। अध्ययन के बाद आए सुझावों पर कुछ कार्य भी हुआ, लेकिन परिणाम शून्य ही रहा। मार्च के मध्य में एक बार फिर डल झील में रिसाव शुरू हो गया था। इस बारे में लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई थी। इससे पहले 2017, 2019, 2020 और नवंबर 2021 में भी झील में रिसाव हो चुका है। नवंबर 2021 में हुए पानी के रिसाव के कारण यहां की मछलियों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया था, जिन्हें झील में दोबारा नहीं डाला गया था। संवाद
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अब तो गाद भी सूखने लगी : जरयाल
स्थानीय निवासी सूरज जरयाल ने कहा कि लाखों लोगों की धार्मिक आस्था के केंद्र डल झील में रिसाव की समस्या कई वर्षों से है, लेकिन अब तक इसे ठीक नहीं किया जा सका है। इस बार तो यह झील की गाद भी रिसाव के कारण सूखने लगी है। कई बार प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी इस कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
स्थानीय लोगों के लिए जाएंगे सुझाव: महापौर
नगर निगम धर्मशाला के महापौर ओंकार नैहरिया ने कहा कि डल झील प्रदेश के लोगों की आस्था का केंद्र है। पहले हुई कई गलतियों के कारण इसका रिसाव नहीं रुक पाया है। अब झील से पानी के रिसाव को रोकने के लिए 10 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार से सहायता मांगी गई है। साथ ही अब यहां के स्थानीय लोगों के सुझावों और सहयोग से काम किया जाएगा।
पर्यटन विभाग के उपनिदेशक विनय धीमान ने कहा कि करीब दो सप्ताह पहले रिसाव की सूचना मिलने के बाद एचपीटीडीसी को स्थिति से निपटने के लिए निर्देश जारी किए गए थे। वे इसके लिए लगातार प्रयासरत हैं। वर्तमान स्थिति का जायजा लेकर सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे।
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हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों के लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक मैक्लोडगंज की डलझील अनदेखी के चलते पूरी तरह से सूख जाएगी। डल झील के रिसाव रोकने के लिए स्थानीय लोग भी कई बार सरकार और प्रशासन से गुहार लगा चुके है, लेकिन अभी तक इसका सही हल नहीं निकल पाया है।
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बाकायदा प्रशासन ने झील से हो रहे रिसाव का अध्ययन भी करवाया था कि किस स्थान पर रिसाव हो रहा है। अध्ययन के बाद आए सुझावों पर कुछ कार्य भी हुआ, लेकिन परिणाम शून्य ही रहा। मार्च के मध्य में एक बार फिर डल झील में रिसाव शुरू हो गया था। इस बारे में लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई थी। इससे पहले 2017, 2019, 2020 और नवंबर 2021 में भी झील में रिसाव हो चुका है। नवंबर 2021 में हुए पानी के रिसाव के कारण यहां की मछलियों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया था, जिन्हें झील में दोबारा नहीं डाला गया था। संवाद
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अब तो गाद भी सूखने लगी : जरयाल
स्थानीय निवासी सूरज जरयाल ने कहा कि लाखों लोगों की धार्मिक आस्था के केंद्र डल झील में रिसाव की समस्या कई वर्षों से है, लेकिन अब तक इसे ठीक नहीं किया जा सका है। इस बार तो यह झील की गाद भी रिसाव के कारण सूखने लगी है। कई बार प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी इस कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
स्थानीय लोगों के लिए जाएंगे सुझाव: महापौर
नगर निगम धर्मशाला के महापौर ओंकार नैहरिया ने कहा कि डल झील प्रदेश के लोगों की आस्था का केंद्र है। पहले हुई कई गलतियों के कारण इसका रिसाव नहीं रुक पाया है। अब झील से पानी के रिसाव को रोकने के लिए 10 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार से सहायता मांगी गई है। साथ ही अब यहां के स्थानीय लोगों के सुझावों और सहयोग से काम किया जाएगा।
पर्यटन विभाग के उपनिदेशक विनय धीमान ने कहा कि करीब दो सप्ताह पहले रिसाव की सूचना मिलने के बाद एचपीटीडीसी को स्थिति से निपटने के लिए निर्देश जारी किए गए थे। वे इसके लिए लगातार प्रयासरत हैं। वर्तमान स्थिति का जायजा लेकर सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे।