{"_id":"66d65626490ef3d6ab0cb0a9","slug":"cradle-centers-should-be-built-for-the-children-of-labor-working-women-dc-kangra-news-c-95-1-ssml1008-145613-2024-09-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रमिक-कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए बने पालना केंद्र : डीसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रमिक-कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए बने पालना केंद्र : डीसी
विज्ञापन
धर्मशाला। उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कामकाजी महिलाओं एवं श्रमिकों के शिशुओं की उचित देखभाल के लिए पालना केंद्र बनाने के लिए प्लान तैयार करने के निर्देश आईसीडीएस विभाग के अधिकारियों को दिए हैं। ताकि कामकाजी महिलाओं एवं श्रमिक महिलाओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े और बच्चों की भी सही देखभाल सुनिश्चित हो सके। सोमवार को उपायुक्त ने जिला मुख्यालय पर महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय का निरीक्षण करने के उपरांत कहा कि जिला कांगड़ा में महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं का दायरा बढ़ाने के लिए विभाग को प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छह साल से कम आयु के बच्चों के विकास और देखभाल में आंगनबाड़ी केंद्रों की बहुत अहम भूमिका रहती है। उन्होंने जिले में मनरेगा कंवर्जेंस के तहत बनने वाले आंगनबाड़ी केंद्र भवनों की सूची और प्रस्ताव जल्द भेजने के निर्देश अधिकारियों को दिए। आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन का समय दोपहर तक होता है, जिसके कारण कामकाजी महिलाएं और कामगारों के बच्चों की देखभाल के लिए उसके बाद कोई नहीं होता।
उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि कामकाजी महिलाएं और कामगारों के बच्चों के लिए उसके बाद भी कोई पालना केंद्र उपलब्ध हो, इसके लिए योजना बनानी चाहिए। उपायुक्त ने जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के नवीकरण का प्रस्ताव और एस्टिमेट भी जल्द बनाने के निर्देश दिए। जिले में कुपोषण और और एनीमिया को पूरी तरह से नियंत्रित करने के लिए विभाग के सभी अधिकारियों को गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने इसका दायरा बढ़ाते हुए जिले में लाभार्थियों की संख्या को अधिक करने के निर्देश विभाग को दिए। डीसी ने इस दौरान महिलाओं के लिए संचालित वन-स्टॉप (सखी) केंद्र के कार्य का भी निरीक्षण किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छह साल से कम आयु के बच्चों के विकास और देखभाल में आंगनबाड़ी केंद्रों की बहुत अहम भूमिका रहती है। उन्होंने जिले में मनरेगा कंवर्जेंस के तहत बनने वाले आंगनबाड़ी केंद्र भवनों की सूची और प्रस्ताव जल्द भेजने के निर्देश अधिकारियों को दिए। आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन का समय दोपहर तक होता है, जिसके कारण कामकाजी महिलाएं और कामगारों के बच्चों की देखभाल के लिए उसके बाद कोई नहीं होता।
विज्ञापन
उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि कामकाजी महिलाएं और कामगारों के बच्चों के लिए उसके बाद भी कोई पालना केंद्र उपलब्ध हो, इसके लिए योजना बनानी चाहिए। उपायुक्त ने जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के नवीकरण का प्रस्ताव और एस्टिमेट भी जल्द बनाने के निर्देश दिए। जिले में कुपोषण और और एनीमिया को पूरी तरह से नियंत्रित करने के लिए विभाग के सभी अधिकारियों को गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने इसका दायरा बढ़ाते हुए जिले में लाभार्थियों की संख्या को अधिक करने के निर्देश विभाग को दिए। डीसी ने इस दौरान महिलाओं के लिए संचालित वन-स्टॉप (सखी) केंद्र के कार्य का भी निरीक्षण किया।
विज्ञापन