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Kangra News: कंपनी ने पैसे लेकर भी नहीं दी स्कूटी, ब्याज सहित लौटाने होंगे 1.26 लाख
Thu, 03 Sep 2026 06:19 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 03 Sep 2026 06:19 AM IST
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धर्मशाला। इलेक्ट्रिक स्कूटी की पूरी कीमत अग्रिम लेने के बावजूद वाहन की डिलीवरी न देने पर जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला ने ओला इलेक्ट्रिक स्टोर के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने संबंधित स्टोर को उपभोक्ता की जमा 1,26,632 रुपये की राशि नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के एवज में 50 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च भी अदा करना होगा। यह निर्णय आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने सुनाया। मामले में चनौर (इंदौरा) निवासी तुलसी राम ने आयोग के पास शिकायत दर्ज करवाई थी।
इसमें तुलसी राम ने कहा था कि उन्होंने 23 सितंबर 2025 को अपनी प्रशिक्षु अधिवक्ता बेटी के लिए ओला एस1 एक्स (थर्ड जेनरेशन) स्कूटी बुक की थी। शोरूम संचालक के कहने पर उन्होंने 1,26,632 रुपये की पूरी कीमत अग्रिम जमा करवा दी थी। उन्हें 13 अक्तूबर 2025 तक स्कूटी सौंपने का आश्वासन दिया गया था।
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शिकायतकर्ता के अनुसार वाहन पोर्टल पर पंजीकरण शुरू होने, इंजन व चेसिस नंबर आवंटित होने और बीमा पॉलिसी बनने के बाद भी स्कूटी नहीं सौंपी गई। बाद में इंदौरा स्थित शोरूम भी बंद हो गया। वाहन न मिलने के बावजूद उपभोक्ता को बैंक की किस्तें चुकानी पड़ीं और बेटी के आने-जाने के लिए 60 हजार रुपये में पुरानी स्कूटी खरीदनी पड़ी। आयोग ने इसे सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार करार देते हुए उपभोक्ता के पक्ष में यह आदेश जारी किया।
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इसके साथ ही उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के एवज में 50 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च भी अदा करना होगा। यह निर्णय आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने सुनाया। मामले में चनौर (इंदौरा) निवासी तुलसी राम ने आयोग के पास शिकायत दर्ज करवाई थी।
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इसमें तुलसी राम ने कहा था कि उन्होंने 23 सितंबर 2025 को अपनी प्रशिक्षु अधिवक्ता बेटी के लिए ओला एस1 एक्स (थर्ड जेनरेशन) स्कूटी बुक की थी। शोरूम संचालक के कहने पर उन्होंने 1,26,632 रुपये की पूरी कीमत अग्रिम जमा करवा दी थी। उन्हें 13 अक्तूबर 2025 तक स्कूटी सौंपने का आश्वासन दिया गया था।
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शिकायतकर्ता के अनुसार वाहन पोर्टल पर पंजीकरण शुरू होने, इंजन व चेसिस नंबर आवंटित होने और बीमा पॉलिसी बनने के बाद भी स्कूटी नहीं सौंपी गई। बाद में इंदौरा स्थित शोरूम भी बंद हो गया। वाहन न मिलने के बावजूद उपभोक्ता को बैंक की किस्तें चुकानी पड़ीं और बेटी के आने-जाने के लिए 60 हजार रुपये में पुरानी स्कूटी खरीदनी पड़ी। आयोग ने इसे सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार करार देते हुए उपभोक्ता के पक्ष में यह आदेश जारी किया।