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मोबाइल फोन चलाने में मास्टर बन गए बच्चे और अभिभावक
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धर्मशाला। पिछले दो साल से कोरोना संकट से जूझ रहे बच्चों को जहां पढ़ाई के मामले में खासा नुकसान हुआ है। वहीं कोरोना काल ने बच्चों और उनके अभिभावकों को मोबाइल को चलाने में मास्टर भी बना दिया है। हालांकि, ज्यादातर बच्चों में लिखने की आदत छूट गई है और उनकी लेखनी भी खराब हो गई थी, जिसमें अब धीरे-धीरे सुधार आ रहा है।
कोरोना काल से पहले जहां बच्चे और अभिभावक गूगल मीट व व्हाट्सऐप आदि से पूरी तरह से अनभिज्ञ थे, आज वह अपने स्मार्ट फोन के हर फीचर से वाकिफ हैं। इसके अलावा आज बच्चे मोबाइल को ऐसे ऑपरेट करते हैं, जैसे कि वह कोई खिलौना हो। मोबाइल में कोई नई गेम को इंस्टाल करना हो या किसी को कॉल करना होगा, यह बात आज एलकेजी और यूकेजी कक्षा के बच्चे जानते हैं। इसके अलावा मोबाइल पर गूगल के माध्यम से अपने प्रश्नों के हल ढूंढने में भी बच्चे माहिर हो गए हैं। हालांकि दो साल तक कोरोना महामारी की वजह से बच्चों के स्वभाव में काफी बदलाव आए हैं। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना, पढ़ाई से दूर भागने जैसी आदि समस्याएं उनमें पैदा हो गई हैं।
लिखने की आदत और लिखावट हुई खराब : प्रवीन
राजकीय प्राथमिक स्कूल मड़दाना दा बेहड़ा में कार्यरत अध्यापक प्रवीन कुमार की मानें तो दो बाल बाद खुले स्कूलों में पहुंचे अधिकतर बच्चों में लिखने की आदत छूट गई है। उनकी लिखावट पर भी असर देखने को मिला। जब स्कूल कोरोना काल के बाद दोबारा शुरू हुए तो सबसे अधिक मेहनत बच्चों को लिखने की आदत डालने और उनकी लिखावट सुधारने में करनी पड़ी।
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कोरोना ने सिखाया मोबाइल को ऑपरेट करना: रेखा
अभिभावक रेखा का कहना है कि कोरोना काल में जहां खासी दिक्कतें झेलनी पड़ी हैं, वहीं इससे बहुत कुछ सीखने को भी मिला है। उनका कहना है कि कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन होने से उन्होंने मोबाइल फोन को अच्छी तरह से चलाना सीख लिया। कोरोना के कारण ही उनके बच्चे भी आज फोन के हर फीचर से वाकिफ हैं।
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कोरोना काल से पहले जहां बच्चे और अभिभावक गूगल मीट व व्हाट्सऐप आदि से पूरी तरह से अनभिज्ञ थे, आज वह अपने स्मार्ट फोन के हर फीचर से वाकिफ हैं। इसके अलावा आज बच्चे मोबाइल को ऐसे ऑपरेट करते हैं, जैसे कि वह कोई खिलौना हो। मोबाइल में कोई नई गेम को इंस्टाल करना हो या किसी को कॉल करना होगा, यह बात आज एलकेजी और यूकेजी कक्षा के बच्चे जानते हैं। इसके अलावा मोबाइल पर गूगल के माध्यम से अपने प्रश्नों के हल ढूंढने में भी बच्चे माहिर हो गए हैं। हालांकि दो साल तक कोरोना महामारी की वजह से बच्चों के स्वभाव में काफी बदलाव आए हैं। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना, पढ़ाई से दूर भागने जैसी आदि समस्याएं उनमें पैदा हो गई हैं।
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लिखने की आदत और लिखावट हुई खराब : प्रवीन
राजकीय प्राथमिक स्कूल मड़दाना दा बेहड़ा में कार्यरत अध्यापक प्रवीन कुमार की मानें तो दो बाल बाद खुले स्कूलों में पहुंचे अधिकतर बच्चों में लिखने की आदत छूट गई है। उनकी लिखावट पर भी असर देखने को मिला। जब स्कूल कोरोना काल के बाद दोबारा शुरू हुए तो सबसे अधिक मेहनत बच्चों को लिखने की आदत डालने और उनकी लिखावट सुधारने में करनी पड़ी।
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कोरोना ने सिखाया मोबाइल को ऑपरेट करना: रेखा
अभिभावक रेखा का कहना है कि कोरोना काल में जहां खासी दिक्कतें झेलनी पड़ी हैं, वहीं इससे बहुत कुछ सीखने को भी मिला है। उनका कहना है कि कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन होने से उन्होंने मोबाइल फोन को अच्छी तरह से चलाना सीख लिया। कोरोना के कारण ही उनके बच्चे भी आज फोन के हर फीचर से वाकिफ हैं।