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नड्डा और जयराम ने ठंडी की बगावत की चिंगारी
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राजा का तालाब/ धर्मशाला। कृपाल आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन न भरने को लेकर राजी हो गए। इस तरह शुक्रवार को नामांकन पत्र भरने के आखिरी दिन फतेहपुर में भाजपा की सियासत पूरी तरह गर्म रही। मुख्यमंत्री अपने पद का अहम त्याग कर खुद रैहन में कृपाल परमार के पास पहुंच गए।
इसके बाद वह कृपाल को अपने हेलीकॉप्टर में ले गए और मान मनौव्वल की बात बन गई। जब रैहन में मुख्यमंत्री कृपाल परमार को मनाने गए तो वहां पर एक मंत्री को कृपाल समर्थकों ने घेर लिया। उनको समर्थकों ने सीएम और कृपाल की बैठक में नहीं जाने दिया। कृपाल परमार ने अमर उजाला को बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दो बार फोन किया जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव न लड़ने का फैसला लिया। मैने 25 साल से निस्वार्थ भाव से पार्टी में काम किया। दो बार चोट मिली और यह आखिरी है। आगे चोट बर्दाश्त नहीं करूंगा।
इनसेट
अब भितरघात का डर, मुकाबला त्रिकोणीय होने के असार
कृपाल परमार के नामांकन न भरने के बाद अब भाजपा के लिए सियासी स्थिति थोड़ी सुखद हुई है। हालांकि, मतदान के दिन भितरघात होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। टिकट के अन्य दावेदार पंकज हैपी, रीता ठाकुर, जगदेव भी खुले तौर पर अब बलदेव का विरोध नहीं कर रहे हैं। ऐसे में फतेहपुर में मुकाबला भवानी पठानिया, बलदेव ठाकुर और राजन सुशांत के बीच त्रिकोणीय होता दिख रहा है।
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इनसेट
कांग्रेस में भी हाईकमान ने खुले विरोध को किया शांत
भाजपा की तरह ही खुले तौर पर कांग्रेस में भी विरोध की चिंगारी को हाईकमान ने सधे हुए तरीके से ठंडा कर दिया है। भवानी पठानिया को टिकट देने का विरोध कर रहे निश्वार ठाकुर के गुट ने आजाद तौर पर नामांकन नहीं भरा। ऐसे में अब कांग्रेस भी खुले तौर पर अपनों के विरोध से बच गई, लेकिन भितरघात का खतरा टला नहीं है। निश्वार ठाकुर ने बताया कि शीर्ष नेतृत्व के कहने पर उन्होंने अपना नामांकन नहीं भरा। मतभेद हैं वो तो रहेंगे लेकिन पार्टी सर्वोपरि है।
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इसके बाद वह कृपाल को अपने हेलीकॉप्टर में ले गए और मान मनौव्वल की बात बन गई। जब रैहन में मुख्यमंत्री कृपाल परमार को मनाने गए तो वहां पर एक मंत्री को कृपाल समर्थकों ने घेर लिया। उनको समर्थकों ने सीएम और कृपाल की बैठक में नहीं जाने दिया। कृपाल परमार ने अमर उजाला को बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दो बार फोन किया जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव न लड़ने का फैसला लिया। मैने 25 साल से निस्वार्थ भाव से पार्टी में काम किया। दो बार चोट मिली और यह आखिरी है। आगे चोट बर्दाश्त नहीं करूंगा।
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अब भितरघात का डर, मुकाबला त्रिकोणीय होने के असार
कृपाल परमार के नामांकन न भरने के बाद अब भाजपा के लिए सियासी स्थिति थोड़ी सुखद हुई है। हालांकि, मतदान के दिन भितरघात होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। टिकट के अन्य दावेदार पंकज हैपी, रीता ठाकुर, जगदेव भी खुले तौर पर अब बलदेव का विरोध नहीं कर रहे हैं। ऐसे में फतेहपुर में मुकाबला भवानी पठानिया, बलदेव ठाकुर और राजन सुशांत के बीच त्रिकोणीय होता दिख रहा है।
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कांग्रेस में भी हाईकमान ने खुले विरोध को किया शांत
भाजपा की तरह ही खुले तौर पर कांग्रेस में भी विरोध की चिंगारी को हाईकमान ने सधे हुए तरीके से ठंडा कर दिया है। भवानी पठानिया को टिकट देने का विरोध कर रहे निश्वार ठाकुर के गुट ने आजाद तौर पर नामांकन नहीं भरा। ऐसे में अब कांग्रेस भी खुले तौर पर अपनों के विरोध से बच गई, लेकिन भितरघात का खतरा टला नहीं है। निश्वार ठाकुर ने बताया कि शीर्ष नेतृत्व के कहने पर उन्होंने अपना नामांकन नहीं भरा। मतभेद हैं वो तो रहेंगे लेकिन पार्टी सर्वोपरि है।