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चिकन और फिश की दुकानें बंद

Tue, 05 Jan 2021 08:50 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2021 08:50 PM IST
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Chicken and fish shops closed due to fear of bird flu
पौंग बांध में विदेशी परिदों की मौतों के बाद वन्य प्राणी विभाग के विशेषज्ञ टीम के सदस्य मृत परिदों - फोटो : Kangra
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। बर्ड फ्लू के चलते चिकन, अंडा और मछली बेचने पर प्रतिबंध लगने के बाद लोगों में दहशत का माहौल है, जबकि इनका व्यवसाय करने वालों को आजीविका चलाना मुश्किल हो गया है। मंगलवार को उपमंडल देहरा के तहत चिकन, अंडा और फिश का काम करने वालों की दुकानें बंद रहीं या कहीं खुली भी तो खरीदार नहीं दिखा। लोग भी इन चीजों को खाने से पूरी तरह से परहेज कर रहे हैं।
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बर्ड फ्लू से उपमंडल देहरा की हरिपुर, देहरा, डाडासीबा और कोटला बेहड़ तहसील के लोग सहमे हुए हैं। लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस से अभी तक छुटकारा मिला नहीं था कि इलाके में अब बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है। प्रशासन ने भी पौंग झील किनारे बसे गांवों के लोगों को घर घर जाकर पौंग डैम क्षेत्र में नहीं जाने की हिदायत दी है।
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वहीं, हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े पोल्ट्री फार्म पर भी प्रशासन पूरी तरह नगर रखे हुए है। जानकारी के अनुसार उपमंडल देहरा के बड़ा गांव में प्रदेश के सबसे बड़े पोल्ट्री फार्म में इस वक्त 40 हजार चूजे हैं, जिसके सैंपल पशुपालन विभाग ले चुका है। इस पोल्ट्री फार्म के चूजों की बाजारी कीमत करीब 60 लाख रुपये बताई जा रही है। पोल्ट्री फार्म के मालिक मैत्री पुष्प बरोटिया का कहना है कि इस समय उनके पास करीब 40 हजार चूजे हैं। ये सभी चूजे 35 से 40 दिन में तैयार हो जाते हैं। सर्दियों में मांग अधिक होने के कारण चूजों की कीमत बढ़ जाती है। इसलिए इस समय एक चूजे की कीमत 45 रुपये के आसपास है। उन्होंने बताया कि उनके पास ये चूजे अंबाला या लुधियाना आदि शहरों में स्थापित हैचरी से आते हैं। माह में फीड आदि पर ही करीब 39-40 लाख रुपये का खर्च आता है। यह फीड सात से दस दिन के भीतर इस्तेमाल करनी होती है। इस पोल्ट्री फार्म से चिकन मंडी, शिमला, मनाली, धर्मशाला आदि इलाकों के अलावा पंजाब में सप्लाई होता है। पोल्ट्री फार्म के मालिक का कहना है कि अभी उनका पोल्ट्री फार्म सुरक्षित है, लेकिन प्रतिबंध का दायरा बढ़ने से उन्हें बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं एसडीएम देहरा धनवीर ठाकुर का कहना है कि पौंग क्षेत्र के किनारे बसने वाले गांवों को पंचायत के माध्यम से घर घर जाकर सूचना दी गई है कि वे पौंग डैम क्षेत्र में न जाएं और पूरी सावधानी बरतें। प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट पर है।
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