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राजनीति के मैदान में फुटबाल बन गया सीयू
सुनील चड्ढा धर्मशाला।
Updated Tue, 02 Feb 2016 10:38 PM IST
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सीयू पर सीएम के तल्ख तेवरों के बाद सोमवार को धर्मशाला में भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के सीयू पर आए बयान ने मामले को और उलझा दिया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस सरकार ही जमीन देना नहीं चाह रही।
केंद्र सरकार तो सीयू परिसर बनाने को तैयार है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बिना पूछे कैसे जदरांगल में विवि का बोर्ड लगा दिया। जबकि, अभी तक जमीन भी ट्रांसफर नहीं हुई। उधर, इसी सम्मेलन में धर्मशाला के पूर्व विधायक एवं मंत्री किशन कपूर ने यह कह कर हलचल बढ़ा दी कि अब केंद्रीय विवि परिसर विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा सरकार ही बनाएगी।
ऐसे में स्मृति ईरानी की मौजूदगी में कपूर के बयान को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता है। केंद्रीय विवि जमीन मामले को लेकर अभी तक दो प्रस्ताव रद्द हो चुके हैं। देहरा और धर्मशाला की राजनीति में केंद्रीय विवि पिस रहा है। शिक्षाविद मानते हैं कि केंद्रीय विवि परिसर के लिए पूरा सियासी ड्रामा राजनीतिक फायदे के लिए रचा जा रहा है। देहरा चूंकि धूमल के पुत्र भाजपा सांसद अनुराग का संसदीय क्षेत्र है।
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वहीं, यह क्षेत्र धूमल के खासमखास रविंद्र रवि का विधानसभा क्षेत्र भी है। इसलिए, वे केंद्रीय विवि के लिए सियासी लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं, धर्मशाला मुख्यमंत्री के खास शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का विस क्षेत्र है। विस चुनाव में उन्होंने केंद्रीय विवि धर्मशाला में बनाने का वायदा किया था। ऐसे में केंद्रीय विवि उनके लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। गौर करने वाली बात यह है कि अब विधानसभा चुनाव को दो वर्ष शेष हैं। ऐसे में कांग्रेस हर हाल में जदरांगल की जमीन को फाइनल करवाना चाह रही है। जबकि, केंद्र में भाजपा नीत सरकार है।
जमीन फाइनल केंद्र की टीम ही करेगी। ऐसे में संकेत कम ही लग रहे हैं कि केंद्रीय टीम आकर जदरांगल में निरीक्षण करे क्योंकि प्रदेश सरकार के बार बार आग्रह पर भी अभी तक केंद्रीय टीम धर्मशाला के पास चिह्नित जमीन का दौरा करने नहीं आ रही है। लेकिन, इस सबके बीच नुकसान सीयू के अस्थायी भवन में पढ़ रहे सैकड़ों बच्चों का हो रहा है। वहीं, केंद्रीय विवि प्रशासन का भी इसमें कम नुकसान नहीं हुआ है। क्योंकि, जमीन के प्रस्तावों पर केंद्रीय विवि प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है।
केंद्र सरकार तो सीयू परिसर बनाने को तैयार है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बिना पूछे कैसे जदरांगल में विवि का बोर्ड लगा दिया। जबकि, अभी तक जमीन भी ट्रांसफर नहीं हुई। उधर, इसी सम्मेलन में धर्मशाला के पूर्व विधायक एवं मंत्री किशन कपूर ने यह कह कर हलचल बढ़ा दी कि अब केंद्रीय विवि परिसर विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा सरकार ही बनाएगी।
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ऐसे में स्मृति ईरानी की मौजूदगी में कपूर के बयान को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता है। केंद्रीय विवि जमीन मामले को लेकर अभी तक दो प्रस्ताव रद्द हो चुके हैं। देहरा और धर्मशाला की राजनीति में केंद्रीय विवि पिस रहा है। शिक्षाविद मानते हैं कि केंद्रीय विवि परिसर के लिए पूरा सियासी ड्रामा राजनीतिक फायदे के लिए रचा जा रहा है। देहरा चूंकि धूमल के पुत्र भाजपा सांसद अनुराग का संसदीय क्षेत्र है।
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वहीं, यह क्षेत्र धूमल के खासमखास रविंद्र रवि का विधानसभा क्षेत्र भी है। इसलिए, वे केंद्रीय विवि के लिए सियासी लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं, धर्मशाला मुख्यमंत्री के खास शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का विस क्षेत्र है। विस चुनाव में उन्होंने केंद्रीय विवि धर्मशाला में बनाने का वायदा किया था। ऐसे में केंद्रीय विवि उनके लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। गौर करने वाली बात यह है कि अब विधानसभा चुनाव को दो वर्ष शेष हैं। ऐसे में कांग्रेस हर हाल में जदरांगल की जमीन को फाइनल करवाना चाह रही है। जबकि, केंद्र में भाजपा नीत सरकार है।
जमीन फाइनल केंद्र की टीम ही करेगी। ऐसे में संकेत कम ही लग रहे हैं कि केंद्रीय टीम आकर जदरांगल में निरीक्षण करे क्योंकि प्रदेश सरकार के बार बार आग्रह पर भी अभी तक केंद्रीय टीम धर्मशाला के पास चिह्नित जमीन का दौरा करने नहीं आ रही है। लेकिन, इस सबके बीच नुकसान सीयू के अस्थायी भवन में पढ़ रहे सैकड़ों बच्चों का हो रहा है। वहीं, केंद्रीय विवि प्रशासन का भी इसमें कम नुकसान नहीं हुआ है। क्योंकि, जमीन के प्रस्तावों पर केंद्रीय विवि प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है।