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Kangra News: कैप्टन रोमेल के हौसलों ने छुड़ाए थे अंग्रेजों के छक्के
Thu, 15 Aug 2024 03:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 15 Aug 2024 03:57 AM IST
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ऑनरेरी सेवानिवृत्त कैप्टन रोमेल सिंह
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राजा का तालाब(कांगड़ा)। उपतहसील राजा का तालाब के गांव बरोह के निवासी 106 वर्षीय रिटायर्ड ऑनरेरी कैप्टन रोमेल सिंह पठानिया के हौसलों ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे। सेवानिवृत्त कैप्टन एवं वरिष्ठ नागरिक रोमेल सिंह पठानिया ने भारतीय थल सेना में अपनी सेवाओं के दौरान देश की रक्षा की खातिर तीन लड़ाइयों और आजाद हिंद फौज में हिस्सा लेकर बता दिया कि उनके अंदर देश भक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा है। उन्होंने बताया कि आजाद हिंद फौज की तरफ से उन्होंने कि 1939-45 के द्वितीय विश्व युद्ध में भी हिस्सा लिया। जबकि अंग्रेजों के समय बजीरेस्तान की लड़ाई में 1945 में भी हिस्सा लिया। वहीं, देश के बंटवारे में भी कई लोगों की जान को बचाया।
1962 के चीन युद्ध और 1965 व 1971 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी वो देश को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। भारतीय सेना की 16 डोगरा रेजिमेंट में लगभग 31 वर्ष सेवाएं दीं। जबकि वर्ष 1976 में वो ऑनरेरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रोमेल सिंह ने बताया कि पश्तो, ऊर्दू, हिंदी और इंग्लिश भाषाओं का उन्हें पूरा ज्ञान हैं। जबकि बिना किसी बाधा के इस उम्र में भी वो बिना किसी की सहायता के खुद स्कूटी चलाते हैं। बिना चश्मे के आज भी नियमित न्यूज पेपर पढ़ते हैं। इतना ही नहीं, वह पूर्ण रूप से शाकाहारी हैं और जीवन में कभी बीड़ी, सिगरेट, शराब, मीट और मछली का उपयोग नहीं किया। उन्होंने बताया कि शारीरिक तौर पर वो बिलकुल फिट हैं, घुटनों में कोई दर्द नहीं, आंखों की रोशनी के साथ-साथ यादाश्त भी बिलकुल ठीक है। रोजाना सुबह चार बजे उठ कर शंख ध्वनि के साथ प्रभु सिमरन के साथ उनकी दिनचर्या शुरू होती है।
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1962 के चीन युद्ध और 1965 व 1971 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी वो देश को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। भारतीय सेना की 16 डोगरा रेजिमेंट में लगभग 31 वर्ष सेवाएं दीं। जबकि वर्ष 1976 में वो ऑनरेरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रोमेल सिंह ने बताया कि पश्तो, ऊर्दू, हिंदी और इंग्लिश भाषाओं का उन्हें पूरा ज्ञान हैं। जबकि बिना किसी बाधा के इस उम्र में भी वो बिना किसी की सहायता के खुद स्कूटी चलाते हैं। बिना चश्मे के आज भी नियमित न्यूज पेपर पढ़ते हैं। इतना ही नहीं, वह पूर्ण रूप से शाकाहारी हैं और जीवन में कभी बीड़ी, सिगरेट, शराब, मीट और मछली का उपयोग नहीं किया। उन्होंने बताया कि शारीरिक तौर पर वो बिलकुल फिट हैं, घुटनों में कोई दर्द नहीं, आंखों की रोशनी के साथ-साथ यादाश्त भी बिलकुल ठीक है। रोजाना सुबह चार बजे उठ कर शंख ध्वनि के साथ प्रभु सिमरन के साथ उनकी दिनचर्या शुरू होती है।
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