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Kangra News: बौद्ध भिक्षु ने सपनों को दिया आकार, झुग्गियों में रहने वालों को मिला अपने घर का उपहार

Mon, 19 May 2025 12:28 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 19 May 2025 12:28 AM IST
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Buddhist monk gave shape to dreams, slum dwellers got the gift of their own house
धर्मशाला। धर्मशाला के आसपास की झुग्गियों में वर्षों से जीवन बिता रहे गरीब प्रवासी परिवारों का अपना घर पाने का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत बनता जा रहा है। इस परिवर्तन के पीछे टोंगलेन चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके निदेशक बौद्ध भिक्षु जामयांग हैं। वह केंद्र सरकार की समेकित आवास एवं स्लम विकास योजना को धर्मशाला नगर निगम के सहयोग से जमीनी स्तर पर साकार करने में जुटे हैं। ट्रस्ट की ओर से हाल ही में 10 नए लाभार्थियों को 25-25 हजार रुपये के चेक देकर आर्थिक सहायता प्रदान की गई। यह राशि स्लम वेलफेयर प्रोग्राम के अंतर्गत दी गई है। शेष 19 लाभार्थियों को भी जल्द ही सहायता राशि उपलब्ध करवाई जाएगी। यही नहीं, अब तक 42 झुग्गीवासी परिवारों को घर दिलाए जा चुके हैं।
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भिक्षु जामयांग ने बताया कि प्रत्येक घर की अनुमानित लागत 1.5 लाख रुपये है। इसमें एक बेडरूम, लिविंग रूम, रसोई, टॉयलेट और बिजली-पानी की सुविधा शामिल है। ट्रस्ट 25 हजार रुपये की सहायता देता है और लाभार्थी खुद 25 हजार रुपये का योगदान करते हैं। शेष राशि जुटाने के लिए ट्रस्ट बैंक लोन या अन्य स्रोतों से सहयोग दिलवाने में मदद करता है।
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रोजगार और रसोई का सामान भी
ट्रस्ट केवल घर तक ही सीमित नहीं है। जिन परिवारों को मकान मिलते हैं, उन्हें गैस स्टोव, सिलिंडर, किचन बर्तन और बिस्तर भी उपहार में दिए जाते हैं। साथ ही, कई लाभार्थियों को धर्मशाला नगर निगम में सफाई कार्य में आउटसोर्स के तहत नौकरी भी दिलवाई गई है, जिससे वे बैंक की किश्तें चुकाने में सक्षम बनते हैं।
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दस्तावेज बनाना चुनौती
भिक्षु जामयांग के अनुसार सबसे बड़ी समस्या मराठी और राजस्थानी मूल के प्रवासी परिवारों के दस्तावेज तैयार करवाना रही। ट्रस्ट की टीम ने लगातार प्रयास कर उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी और अन्य ज़रूरी कागजात तैयार करवाए ताकि वे सरकारी योजना का लाभ ले सकें।

लाभार्थियों की प्रतिक्रिया
40 वर्षों से झुग्गी में रहने वाले सुलीचंद ने कहा कि हमने सोचा नहीं था कि कभी अपना घर होगा। टोंगलेन संस्था ने यह सपना पूरा कर दिखाया है। वहीं, नीलम, कल्पना और लताशा जैसी महिला लाभार्थियों ने भी आभार प्रकट किया और चेक लेते वक्त उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और सम्मानजनक हो गया है।
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