{"_id":"692ee82ec17162f6f50e87b1","slug":"bank-misled-and-collected-installments-of-secured-loan-now-compensation-will-have-to-be-paid-kangra-news-c-95-1-kng1004-208858-2025-12-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: बैंक ने गुमराह कर सुरक्षित लोन की किस्तें वसूलीं, अब देना होगा पांच लाख मुआवजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: बैंक ने गुमराह कर सुरक्षित लोन की किस्तें वसूलीं, अब देना होगा पांच लाख मुआवजा
Wed, 03 Dec 2025 06:51 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 03 Dec 2025 06:51 AM IST
विज्ञापन
धर्मशाला। जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला ने ग्राहक को गुमराह करने और सेवा में कमी पाए जाने पर निजी बैंक और उसकी इंश्योरेंस विंग के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह पीड़ित महिला को पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दे। साथ ही गलत तरीके से वसूली गई सारी किस्तें ब्याज सहित लौटाई जाएं। होम लोन की बाकी राशि बीमा कंपनी भरेगी।
सिद्धबाड़ी निवासी बिंदू सिंह ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि उनके पति कुलदीप सिंह भारद्वाज ने वर्ष 2010 में घर खरीदने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से 46,32,500 रुपये का होम लोन लिया था। वह नियमित रूप से किस्तें भर रहे थे। 23 अप्रैल 2021 को कोविड-19 के कारण कुलदीप सिंह की मौत हो गई। तब तक वह 128 से अधिक ईएमआई चुका चुके थे।
पति की मौत के बाद बिंदू सिंह ने बैंक से संपर्क कर लोन को इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत सेटल (निपटाने) करने का अनुरोध किया, क्योंकि उनके पति ने बताया था कि लोन सुरक्षित है। मगर बैंक ने साफ मना कर दिया कि इस लोन खाते पर कोई इश्योरेंस पॉलिसी नहीं है। मजबूरन बिंदू सिंह को 50,012 रुपये की मासिक ईएमआई भरनी पड़ी। बाद में जब उन्हें घर के दस्तावेजों में इंश्योरेंस के कागज मिले तो बैंक का झूठ पकड़ा गया।
विज्ञापन
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया है। फैसले के अनुसार बैंक और इंश्योरेंस कंपनी ग्राहक को पांच लाख रुपये मुआवजा देंगे। पति कुलदीप सिंह भारद्वाज की मौत के बाद बिंदू सिंह से जितनी भी ईएमआई ली गई हैं, उन्हें ब्याज सहित वापस करना होगा।
इसके अलावा होम लोन की बची हुई राशि का भुगतान इंश्योरेंस कंपनी की ओर से बैंक को किया जाएगा। भुगतान पूरा होते ही बैंक उपभोक्ता को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करेगा। इसके साथ ही बैंक को आदेश दिया है कि शिकायतकर्ता को 20 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी चुकाए।
विज्ञापन
सिद्धबाड़ी निवासी बिंदू सिंह ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि उनके पति कुलदीप सिंह भारद्वाज ने वर्ष 2010 में घर खरीदने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से 46,32,500 रुपये का होम लोन लिया था। वह नियमित रूप से किस्तें भर रहे थे। 23 अप्रैल 2021 को कोविड-19 के कारण कुलदीप सिंह की मौत हो गई। तब तक वह 128 से अधिक ईएमआई चुका चुके थे।
विज्ञापन
पति की मौत के बाद बिंदू सिंह ने बैंक से संपर्क कर लोन को इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत सेटल (निपटाने) करने का अनुरोध किया, क्योंकि उनके पति ने बताया था कि लोन सुरक्षित है। मगर बैंक ने साफ मना कर दिया कि इस लोन खाते पर कोई इश्योरेंस पॉलिसी नहीं है। मजबूरन बिंदू सिंह को 50,012 रुपये की मासिक ईएमआई भरनी पड़ी। बाद में जब उन्हें घर के दस्तावेजों में इंश्योरेंस के कागज मिले तो बैंक का झूठ पकड़ा गया।
विज्ञापन
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया है। फैसले के अनुसार बैंक और इंश्योरेंस कंपनी ग्राहक को पांच लाख रुपये मुआवजा देंगे। पति कुलदीप सिंह भारद्वाज की मौत के बाद बिंदू सिंह से जितनी भी ईएमआई ली गई हैं, उन्हें ब्याज सहित वापस करना होगा।
इसके अलावा होम लोन की बची हुई राशि का भुगतान इंश्योरेंस कंपनी की ओर से बैंक को किया जाएगा। भुगतान पूरा होते ही बैंक उपभोक्ता को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करेगा। इसके साथ ही बैंक को आदेश दिया है कि शिकायतकर्ता को 20 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी चुकाए।