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Kangra News: सीयू में शुरू होगा अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम
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सीयू को देहरा परिसर
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएचपी) में विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (एईडीपी) शुरू किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए वर्ष 2026 का अध्यादेश तैयार कर लिया है। यह पहल स्नातक डिग्री पाठ्यक्रमों में व्यावहारिक प्रशिक्षण को सीधे पाठ्यक्रम और क्रेडिट प्रणाली से जोड़ेगी।
इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को कक्षा में सैद्धांतिक ज्ञान हासिल करने के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों व व्यावसायिक संस्थानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा। यह पूरी व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप तैयार की गई है। एईडीपी को आगे की उच्च शिक्षा और सरकारी व गैर-सरकारी नौकरियों सहित सभी भर्ती प्रक्रियाओं में नियमित डिग्री के समकक्ष माना जाएगा।
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के सभी स्नातक डिग्री पाठ्यक्रमों पर समान रूप से लागू होगा। योजना के तहत एक वर्ष के स्नातक प्रमाणपत्र के लिए कुल 40 क्रेडिट अनिवार्य होंगे। इनमें से 10 क्रेडिट विद्यार्थियों को ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग के माध्यम से अर्जित करने होंगे।
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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाकर उद्योगों में मौजूद कौशल अंतर को पाटना है। केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को आंशिक स्टाइपेंड भी मिलेगा। अध्यादेश के अनुसार चार या अधिक कर्मचारियों वाले संस्थान अप्रेंटिस रखने के पात्र होंगे। 30 या अधिक कर्मियों वाले संस्थानों के लिए यह अनिवार्य रहेगा। संस्थान कुल कर्मचारियों के 2.5 से 15 फीसदी तक अप्रेंटिस रख सकेंगे।
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नियमित डिग्री के समान मिलेगी मान्यता
केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में एईडीपी के तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक कार्य अनुभव मिलेगा। विश्वविद्यालय के प्रस्तावित अध्यादेश के अनुसार यह डिग्री आगे की पढ़ाई और नौकरियों के लिए नियमित डिग्री के बराबर मान्य होगी। यह व्यवस्था सभी स्नातक कार्यक्रमों पर लागू रहेगी। प्रवेश के लिए पात्रता नियम विश्वविद्यालय अध्यादेश, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना और संबंधित वैधानिक निकायों के दिशा-निर्देशों के तहत तय होंगे। -प्रो. एसपी बंसल, कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय
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इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को कक्षा में सैद्धांतिक ज्ञान हासिल करने के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों व व्यावसायिक संस्थानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा। यह पूरी व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप तैयार की गई है। एईडीपी को आगे की उच्च शिक्षा और सरकारी व गैर-सरकारी नौकरियों सहित सभी भर्ती प्रक्रियाओं में नियमित डिग्री के समकक्ष माना जाएगा।
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यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के सभी स्नातक डिग्री पाठ्यक्रमों पर समान रूप से लागू होगा। योजना के तहत एक वर्ष के स्नातक प्रमाणपत्र के लिए कुल 40 क्रेडिट अनिवार्य होंगे। इनमें से 10 क्रेडिट विद्यार्थियों को ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग के माध्यम से अर्जित करने होंगे।
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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाकर उद्योगों में मौजूद कौशल अंतर को पाटना है। केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को आंशिक स्टाइपेंड भी मिलेगा। अध्यादेश के अनुसार चार या अधिक कर्मचारियों वाले संस्थान अप्रेंटिस रखने के पात्र होंगे। 30 या अधिक कर्मियों वाले संस्थानों के लिए यह अनिवार्य रहेगा। संस्थान कुल कर्मचारियों के 2.5 से 15 फीसदी तक अप्रेंटिस रख सकेंगे।
नियमित डिग्री के समान मिलेगी मान्यता
केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में एईडीपी के तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक कार्य अनुभव मिलेगा। विश्वविद्यालय के प्रस्तावित अध्यादेश के अनुसार यह डिग्री आगे की पढ़ाई और नौकरियों के लिए नियमित डिग्री के बराबर मान्य होगी। यह व्यवस्था सभी स्नातक कार्यक्रमों पर लागू रहेगी। प्रवेश के लिए पात्रता नियम विश्वविद्यालय अध्यादेश, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना और संबंधित वैधानिक निकायों के दिशा-निर्देशों के तहत तय होंगे। -प्रो. एसपी बंसल, कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय